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ठंड के कारण आ रहे हैं ब्रेन अटैक, 14% लोगों की मौत | BRAIN ATTACK GWALIOR NEWS

ग्वालियर। अंचल में ठंड का मौसम अब जानलेवा हो गया है। सुबह 4 से 6 बजे के बीच लोग ब्रेन अटैक का शिकार हो रहे हैं। इनमें से 14% लोगों की मौत हो रहीं हैं जबकि शेष लाखों रुपए खर्च करके जान बचा पा रहे हैं। केवल जयारोग्य चिकित्सालय में 6 दिन में न्यूरोलॉजी विभाग और मेट्रो न्यूरो हॉस्पिटल में अकेले ब्रेन अटैक के ही 75 मरीज पहुंचे। इनमें से 10 की मौत हो गई। बता दें कि ब्रेन अटैक के मामलों में प्राइवेट अस्पतालों का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा है। 

न्यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश उदैनियां ने बताया कि जेएएच में आए मरीजों में से ज्यादातर को सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच ब्रेन अटैक आया। वजह- सर्दी के कारण खून का गाढ़ापन बढ़ जाना और कैटीकोलामीन हार्मोन से ब्लडप्रेशर बढ़ना रहा। इन कारणों के चलते लोगों को ब्रेन अटैक आया। इनमें से कुछ मरीज ऐसे थे जिन्होंने ब्लडप्रेशर की दवा बंद कर दी थी या कभी ब्लडप्रेशर चेक ही नहीं कराया।  न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संतोष त्रिपाठी का कहना है कि उनके यहां ब्रेन अटैक के जो केस आए, उनमें अधिकांश को सुबह 5 बजे से 9 बजे के बीच अटैक आया। इस दौरान ब्लडप्रेशर अधिक रहता है। 

ब्रेन अटैक क्यों आता है | Why does brain attack
दिमाग में धमनी के फटने के कारण ब्रेन अटैक होता है। इससे आसपास के ऊतकों में खून बहने लगता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं का नाश कर देता है।
अत्यधिक सर्दी में शरीर में कैटीकोलामीन हार्मोन बढ़ जाता है, जो ब्लडप्रेशर बढ़ने का मुख्य कारण होता है। इसी तरह फिब्रिनोजन नामक पदार्थ शरीर में बनने लगता है, जिसके कारण खून गाढ़ा होने लगता है। इस दौरान जब ब्रेन में खून पहुंचने में रुकावट आती है तो ब्रेन अटैक और खून हार्ट में नहीं पहुंच पाता तो हार्ट अटैक होता है। 

ब्रेन अटैक के लक्षण | Symptoms of brain attack
अचानक हाथ-पैर सुन्न पड़ना या काम करना बंद कर देना। आवाज लड़खड़ाना, आवाज बंद हो जाना, यकायक बेहोश हो जाना।

ब्रेन अटैक से बचने के लिए क्या करें | What to Do to Avoid Brain Attack
सर्दी मौसम में डायबिटीज, ब्लडप्रेशर के मरीज तथा पूर्व में जिन मरीजों को ब्रेन या हार्ट अटैक आया है, वे विशेष सावधानी बरतें। धूप निकलने के बाद ही घर से निकलें। सर्दी से पूरा बचाव रखें और नियमित दवा लें।