Advertisement

BHOPAL शहर में से मौतें जारी, अफसर मच्छरदानी नहीं बांट रहे | MP NEWS



भोपाल। भोपाल में जीका, डेंगू और चिकनगुनिया बुखार के संक्रमण को काबू करने के लिए प्रभावित इलाकों में मेडिकेटेड मच्छरदानी बांटी जाना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य शासन को ऐसी 3 लाख मच्छरदानियां सप्लाई भी कर दीं। लेकिन अफसर मच्छरदानी न बांटना पड़े, इसको लेकर रोजाना नए-नए बहाने बना रहे हैं। पहले अफसरों ने इन्हें बंटवाने की बजह आचार संहिता लागू होने का हवाला दिया। जबकि मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने यह साफ कर दिया कि आयोग ने मच्छरदानी बांटने पर कोई रोक नहीं लगाई है। 

वहीं, दूसरी ओर सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने अफसरों से पूछा कि यह जानकारी किसने दी है कि मच्छरदानियां चुनाव आचार संहिता के चलते नहीं बांटी जा रही हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर डॉ बीएन चौहान ने जवाब दिया कि जिस अफसर ने यह जानकारी दी है। उससे पूछताछ चल रही है। साथ ही डॉ चौहान ने पीएस को बताया कि मच्छरदानियों की क्वालिटी की टेस्टिंग रिपोर्ट नहीं आई है। इसलिए इनको बांटा नहीं गया है। रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर यह रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद इन्हें बांटा जाएगा। 

जीका का एक पॉजिटिव मरीज और मिला, जांच करने पहुंचे अफसर 

होशंगाबाद जिले में जीका बुखार का एक अौर पॉजिटिव मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर सोमवार को जांच के लिए पहुंचे। जीका बुखार के अब तक प्रदेश के 6 जिलों में 128 मरीज मिले चुके हैं। जबकि 37 ब्लड सैंपल की रिपोर्ट एम्स में पेंडिंग चल रही है। सोमवार सुबह आई 57 ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट में एक भी मरीज को जीका होने की पुष्टि नहीं हुई है। 

वेयरहाउस का ही हर महीने का खर्च एक लाख रुपए आएगा 

अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में नेशनल वेक्टर बोर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भोपाल संभाग के लिए 5 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियों की सप्लाई दी थी। यह मच्छरदानी मंडीदीप और बैरसिया स्थित वेयरहाउस में रखी गई हैं। हर महीने इसके लिए एक लाख रुपए खर्च होंगे। 

5 साल तक चलेगी मच्छरदानी 

मेडिकेटेड मच्छरदानी निशुल्क बंटी जाएंगी। मच्छरदानी की खासियत उसमें डेल्टामैथ्रिन दवा की लेयर होती है। इसके चलते मच्छर इसके आसपास नहीं आता है। मच्छरदानी की क्वालिटी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है कि 20 धुलाई तक असरकारक होगी यानी तीन से पांच साल तक इसका उपयोग किया जा सकता है।