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भूल कर भी मत देखना चतुर्थी का चांद, यदि देख लिया तो... | Ganesh Chaturthi Ka Chand

चांद की खूबसूरती हर किसी को आकर्षित करती है और यही कारण है कि प्राचीन काल से ही कविताओं में या ग्रंथों में स्त्रियों के सुन्दरता की तुलना चांद से की जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के दिन इसी चाँद को देखना आपको बहुत भारी पड़ सकता है। जी हां, इस बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि आखिर गणेश चतुथी के दिन चांद को क्‍यों नहीं देखना चाहिए और अगर देख भी लिया तो इससे क्या नुकसान हैं।

क्‍या है मान्‍यता 
ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चांद बेहद खूबसूरत नजर आता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन गणेश भगवान ने चांद को यह श्राप दिया कि जो भी इस दिन चांद का दीदार करेगा उसे कलंक लगेगा। गणेश पुराण के अनुसार एक बार भगवान श्री कृष्ण ने भी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन आसमान में नज़र आ रहे खूबसूरत चांद को देख लिया और फिर कुछ ही दिनों बाद उन पर हत्या का झूठा आरोप लगा। श्रीकृष्ण को बाद में नारद मुनि ने ये बताया कि ये कलंक उन पर इसलिए लगा है क्योंकि उन्होंने चतुर्थी के दिन चाँद देख लिया। 

गणेश पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार गणेश जी के सूंड वाले मुख को देखकर एक बार चांद को हंसी आ गयी। इससे गणेश जी बहुत नाराज़ हो गये और उन्होंने चांद से कहा कि, तुम्हे अपनी खूबसूरती पर बहुत गुरुर है...आज मैं तुम्हे श्राप देता हूँ कि आज के दिन तुम्हें जो भी देखेगा उसे कलंक लगेगा। तब से लेकर आज तक गणेश चतुर्थी के दिन चाँद को देखने से मना किया जाता है। गणेश जी के श्राप से चन्द्रमा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे दुखी मन के साथ घर में जाकर छिपकर बैठ गये। बाद में जाकर सभी देवताओं ने चन्द्रमा को मनाया और उन्हें समझाया कि वे मोदक और पकवान बनाकर गणेश जी की पूजा अर्चना करें जिससे वे खुश हो जाएंगे। बाद में चन्द्रमा में ऐसा ही किया तब जाकर भगवन गणेश खुश तो हुए लेकिन उन्होंने कहा कि श्राप पूरी तरह खत्म नहीं होगा जिससे आने वाली पीढ़ियों को ये याद रहे कि किसी के रुप रंग को देखकर उपहास नहीं उड़ना चाहिए। इसलिए आप भी आगे से ये गलती ना करें और गणेश चतुर्थी के दिन मोदक और पकवान बनाएं और ख़ुशी से यह त्‍योहार मनाएं। 

यदि चांद देख लिया तो करें ये उपाय: 
अगर आपने चांद देखने की गलती कर दी है तो इस दिन भागवत की स्यमंतक मणि की कथा सुने और पाठ करें। या फिर मौली में 21 दूर्वा बांध कर  मुकुट बनाएं और उसे गणेश जी को पहनाएं। 
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