अध्यापकों का वेतन कम करने पर हाईकोर्ट की रोक | ADHYAPAK SAMACHAR

25 September 2018

जबलपुर। पंचायत विभाग के आदेश दिनांक 07/07/2017 के क्रियान्वयन से उद्भूत मासिक वेतन में कमी किये जाने पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई। हर महीने कम वेतन पाना, निरंतर वाद हेतु, उत्पन्न करता है, देरी से कोर्ट आने का आधार अमान्य। राज्य शासन के निर्णयानुसार अध्यापक संवर्ग को छठवें वेतन का लाभ वर्ष 2016 से दिया गया था। उल्लेखनीय है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिनांक 07.07.2017 को आदेश जारी कर पूर्व के आदेशों को निरस्त कर नई वेतन निर्धारण प्रक्रिया के अनुसार वेतन निर्धारण प्रारंभ किया गया। परिणाम स्वरूप विद्दमान वेतन से कम पर निर्धारण होने पर मासिक वेतन में हुई उपरोक्त विसंगति न्यायिक अनुवीक्षण के अधीन आने पर एवं अध्यापक संघों की मांग के चलते दिनांक 21/12/2017 को स्पष्टीकरण जारी कर विसंगति को दूर करने का प्रयास किया गया। 

परन्तु, उपरोक्त स्पष्टीकरण विचारशील निर्णय न होने के कारण, अध्यापक संवर्ग में 2006 के पश्चात नियुक्त संविदा शिक्षक वर्ग-2 (वर्तमान अध्यापक) का वेतन, आदेश दिनाँक 07.07.2017 एवम स्पष्टीकरण के अनुसार किये जाने पर, वर्तमान वेतन कम हो रहा है, एवम संवर्ग में कनिष्ठ अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार, शिक्षा कर्मियों के रूप में की गई सेवाओं की वेतन वृद्धि, नए निर्धारण में न दिए जाने के परिणामस्वरूप, शिक्षाकर्मियों (अध्यापकों) का वेतन भी कम हो रहा था। पद्दोन्नति/क्रमोन्नति प्राप्त अध्यापकों को कम वेतन पर फिक्स किये जाने का विषय भी कोर्ट के समक्ष उठाया गया। 

परिणामस्वरूप, रायसेन जिले में पदस्थ श्रीमती आरती नामदेव, एवं 18 अन्य, सतना जिले में कार्यरत श्री सुधाकर त्रिपाठी एवं 3 अन्य, नरसिंहपुर से हरि सिंह बरकडे एवं 3 अन्य, अनूपपुर से श्रीमती हेमा सोनी, होशंगाबाद में कार्यरत श्री गिरीश कुमार गौतम एवं 7अन्य, होशंगाबाद , भोपाल जिले में पदस्थ श्रीमती निधी शर्मा एवं 14 अन्य, मंडला से राम शंकर पांडेय एवं अन्य, बालाघाट से मिलाप सिंह ठाकरे एवं अन्य, छिंदवाड़ा से मनीष दुबे एवं अन्य, बुराहनपुर से श्रीमती ममता जमबेकर एवं अन्य , डिंडोरी से लष्मीकांत बर्मन, अनूपपुर से अरुणेंद्र प्रताप सिंहः, सागर से जगदीश पटेल , कमलेश दुबे द्वारा, जबलपुर हाई कोर्ट के समक्ष, राज्य शासन एवं अन्य के विरुद्ध रिट याचिका दायर की गई थी। 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री अमित चतुर्वेदी से प्राप्त जानकारी के अनुसार , प्रारम्भिक तौर पर माननीय हाईकोर्ट, जबलपुर, का ध्यान अध्यापक संविलियन नियम, वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 (छठवां वेतनमान) के अनुसार 1.86 का गुणा 3 प्रतिशत की वृद्धि सहित एवं 6 माह से ऊपर की अवधि को पूर्ण वर्ष न माने जाने, एवं शिक्षा कर्मियों को पूर्व की सेवाओं के बदले अप्राप्त वेतन वृद्धियों की ओर आकृष्ट किया गया है। माननीय हाई कोर्ट जबलपुर ने सरकारी पक्ष के विरोध के बाद भी समानता के आधार पर अंतरिम आदेश पारित कर, आदेश दिनांक 07/07/2017 के क्रियान्वयन पर रोक लगाकर, वेतन कम न करने के निर्देश के साथ, राज्य शासन एवम अन्य को नोटिस जारी किए हैं।
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