मप्र में एट्रोसिटी एक्ट के 75% मामले झूठे: बार एसोसिएशन हाईकोर्ट | MP NEWS

21 September 2018

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की एक स्टडी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों में 75 प्रतिशत झूठे होते हैं। एसोसिएशन ने यह भी बताया कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत सबसे ज्यादा मामले पिछड़ा वर्ग के लोगों के खिलाफ होते हैं। इनका औसत 80 प्रतिशत है जबकि सामान्य वर्ग के खिलाफ केवल 20 प्रतिशत मामले ही दर्ज होते हैं। यानि एट्रोसिटी एक्ट से सबसे ज्यादा पीड़ित पिछड़ा वर्ग है जबकि एक्ट का मुखर विरोध ब्राह्मण, क्षत्रिय सहित सवर्ण समाज कर रहा है। 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसएिशन प्रदेशभर के अधिवक्ताओं का मूल संगठन माना जाता है, जिसके दायरे में प्रदेश का हर एक अधिवक्ता आते है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आदर्शमुनि त्रिवेदी के मुताबिक एक अधिवक्ता 100 लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। सरकार ने जिस तरीके से एट्रोसिटी एक्ट को लागू किया है, उसका परिणाम समाज के सामने है।

उन्‍होंने कहा कि कोई भी अधिवक्ता एसटी-एससी एक्ट के खिलाफ नहीं है, लेकिन संशोधन के बाद उसके जो परिणाम सामने आए हैं, उससे समाज का एक बड़ा तबका प्रभावित हो गया है। त्रिवेदी के मुताबिक हाल ही में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर हाईकोर्ट और जिला न्‍यायालयों में कराए गए सर्वे में ये स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश में एट्रोसिटी एक्ट के तहत दर्ज 75 प्रतिशत मामले झूठे हैं। इनमें भी पिछड़ा वर्ग के लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या 80 प्रतिशत है।

त्रिवेदी का कहना है कि वे मुख्यमंत्री को सड़कों पर काले झंडे दिखाने में विश्‍वास नहीं रखते हैं, लेकिन सरकार ने अगर जल्‍द ही एट्रोसिटी एक्ट के दुष्परिणामों को दूर करने के लिए कदम नहीं उठाए तो उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है। मध्यप्रदेश और देश की प्रमुख खबरें पढ़ने, MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करेंया फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com

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