खजाना खाली स्कूल चलाने के लिए दानदाताओं पर आश्रित सरकार | MP NEWS

13 August 2018

भोपाल। अब तक सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी तरफ से बजट दिया जाता था परंतु अब सरकारी खजाना खाली हो चुका है अत: सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया है कि वो अपने-अपने इलाकों में दानदाताओं की तलाश करें और उनसे कुछ जरूरी उपयोगी चीजें बतौर दान प्राप्त करें। इसके लिए सरकार ने विधिवत जन-भागीदारी योजना शुरू कर दी है। याद दिला दें कि ये वही सरकार है जो डमरू बजाकर लाखों रुपए का बिजली बिल जीरो कर देती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को विद्यालय उपहार योजना में जन-सामान्य को प्रोत्साहित करने के लिये निर्देश भी दिये हैं।

BRCC को बताएं क्या-क्या चाहिए
विद्यालय उपहार योजना में सभी सरकारी विद्यालय अपनी विद्यालयीन आवश्यकताओं को चिन्हित कर उनकी पूर्ति के लिये समाज से उपहार प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के भौतिक एवं अकादमिक विकास के लिये समाज से वस्तुरूप सहायता उपहार के रूप में प्राप्त करना है। स्कूल शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल पर विद्यालय उपहार नाम से मॉड्यूल उपलब्ध करवाया गया है। इसके माध्यम से सरकारी विद्यालय अपनी आवश्यकताओं को विकास खंड स्त्रोत समन्वयक के माध्यम से अपलोड कर सकेगें। 

किस तरह के उपहार लिए जाएंगे
जो संस्था, व्यक्ति, समूह, ट्रस्ट या कम्पनी 10 हजार रुपये तक की राशि के बराबर की सामग्री सरकारी स्कूल को उपहार के रूप में उपलब्ध करवायेगा, उसे विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा धन्यवाद पत्र भी दिया जायेगा। योजना में 10 हजार रुपये से अधिक की सहायता करने वालों का नाम एजुकेशन पोर्टल पर प्रदर्शित किया जायेगा। जिन क्षेत्रों में विद्यालय वस्तु रूप उपहार प्राप्त कर सकेगें उनमें छात्रावास के किचन के लिए आवश्यक सामग्री, शुद्ध पेयजल हेतु फिल्टर, वाटर कूलर, पंखें, विद्यालय परिसर में कुओं या ट्यूबवेल खनन करवा कर देना, विद्यालय को फर्नीचर उपलब्ध करवाना, खेल सामग्री दान आदि प्रमुख है।

इन्हीं चीजों के लिए तो शिक्षा उपकर लेती है सरकार
ये सभी वो चीजें हैं जिनके लिए सरकार टैक्स वसूली करती है। यहां तक कि आपके बिजली के बिल में भी शिक्षा उपकर वसूला जाता है चाहे आपके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हों या ना पढ़ते हों। सवाल यह है कि सरकार शिक्षा के नाम पर वसूले जाने वाला टैक्स शिक्षा पर ही खर्च क्या स्कूलों पर खर्च नहीं किया जाता। क्या इस टैक्स के पैसों से फोटो वाले विज्ञापन जारी कर दिए गए।  
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