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आयुक्त जनजाति विभाग द्वारा मंत्रिमंडल के निर्णय को ठुकराया गया

प्रमोद ठाकुर। मध्यप्रदेश में अध्यापक संवर्ग की ऑनलाइन अन्तरनिकाय संविलियन 2017 मध्यप्रदेश कैबिनेट से प्रस्ताव पास है जो आयुक्त जनजाति विभाग के उच्च अधिकारी द्वारा महामहिम राज्यपाल के नाम से मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा जारी किया गया है। जिसमे गंभीर बीमारी से पीड़ित, विकलांग, और गैर आदिवासी क्षेत्र से आदिवासी क्षेत्र में, अन्तरनिकाय संविलियन चाहने वाले अध्यापकों को प्राथमिकता दिया गया है। 

नीति के अनुसार सभी अध्यापकों का अन्तरनिकाय संविलियन हो गया है किंतु आयुक्त जनजाति विभाग द्वारा अचानक कार्यमुक्ति पर रोक लगा दिया गया जो अनुचित है। क्योंकि अन्तरनिकाय संविलियन नीति 10 जुलाई 2017 को जारी किया गया था और सभी विभागों को नीति की प्रतिलिपि भेज गया था इसके बाद ऑनलाइन प्रकिया 21 अगस्त 2017 के परिपत्र के अनुसार हुआ।

तब तक आयुक्त जनजाति विभाग भोपाल को कोई आपत्ति नही था लेकिन जब अन्तरनिकाय संविलियन हो गया और अध्यापक कार्यमुक्त होने लगें तो रोक लगा दिया गया। जो अध्यापक के साथ अन्याय है एवम मध्यप्रदेश कैबिनेट की नीति को एक अधिकारी द्वारा न मानना लोकतंत्र की अपमान है।
लेखक प्रमोद ठाकुर, जिला सीहोर में वरिष्ठ अध्यापक हैं। 
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