मप्र में ENGINEERING STUDENTS से कराया जाएगा सरकारी योजनाओं का प्रचार

भोपाल। यूं तो प्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष विभाग गठित है, नाम है डीएवीपी जो भारत सरकार का विभाग है। मप्र में जनसंपर्क संचालनालय, इसके अलावा 'माध्यम' और इसके जैसी कुछ अन्य ऐजेंसियां भी हैं। इनके पास हजारों करोड़ का बजट भी है परंतु यह सारा बजट सीएम शिवराज सिंह की बड़ी-बड़ी फोटो वाले विज्ञापनों पर खर्च किया जा रहा है और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए कॉलेज स्टूडेंट्स को लगाया जा रहा है। राजीव गांधी प्रफेशनल यूनिवर्सिटी के इंजिनियरिंग छात्रों को इसके लिए टारगेट किया गया है। वह गांव-गांव जाकर सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को बताएं और उनसे फीडबैक भी लें। मजेदार यह है कि यदि वो सरकारी योजनाओं का प्रचार करते हैं तो उन्हे परीक्षा में अच्छे ग्रेड का वादा किया गया है। चाहे वो इंजीनियरिंग सीख पाए या नहीं। छात्रों को यह टास्क एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत दिया गया है। छात्रों से कहा गया है कि वह पांच गावों में जाएंगे और वहां से राष्ट्रीय योजनाओं पर सूचनाएं एकत्र करेंगे। उनके बनाए गए डेटाबेस को भारत सरकार में भेजा जाएगा। 

सर्वे के लिए 100 छात्रों की लिस्ट

मध्य प्रदेश के सारे इंजिनियरिंग कॉलेजों की राजीव गांधी प्रफेशनल यूनिवर्सिटी (आरजीपीवी) से ही संबद्धता है। यूनिवर्सिटी ने सर्वे के लिए 100 छात्रों की लिस्ट बनाई है। छात्रों के एक फॉर्म दिया जाएगा। इस फॉर्म में छात्र को उस परिवार का संपूर्ण विवरण भरना होगा, जहां वे जाएंगे। आरजीपीवी की योजना समन्वयक सविता व्यास ने बताया कि छात्र अपनी स्वेच्छा से सर्वे करने के लिए तैयार हुए हैं। यह सर्वे 11 जून से 15 जून के बीच होगा। ये 100 छात्र 700 ग्रामीण इलाके के परिवारों में जाएंगे। छात्र जिस परिवार में जाएंगे उनसे उनकी जाति, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट डीटेल, वैवाहिक स्थिति, मनरेगा के काम संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना और जीवन ज्योति योजनाओं सहित 17 योजनाएं के बारे में उनसे पूछा जाएगा। 

छात्रों ने कहा हम इंजिनियरिंग पढ़ने आए हैं सर्वे करने नहीं

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए अधिकांश छात्रों ने इस फैसले का विरोध किया। छात्रों ने कहा कि वह इंजिनियरिंग के छात्र हैं, कोई सर्वे करने वाले नहीं हैं। उन्होंने इंजिनियरिंग पढ़ने के लिए कॉलेज में प्रवेश लिया था न कि घर-घर जाकर सरकारी योजनाओं के बारे में पूछने के लिए। वे लोग कोई सरकारी + कर्मचारी नहीं हैं जो उनसे सर्वे कराया जा रहा है। 

सर्वे में लगाए गए छात्रों ने बताया कि यूनिवर्सिटी की तरफ से उन्हें यह वादा किया गया है कि अगर उन लोगों ने सर्वे का काम किया तो परीक्षाओं में उन्हें इसका फायदा मिलेगा। एक छात्र ने बताया कि उसे कहा गया है कि सर्वे का काम पूरा करने पर उसे परीक्षा में अच्छे ग्रेड दिए जाएंगे। हालांकि छात्रों की इस बात को यूनिवर्सिटी ने नकारा है। यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा कि यह सर्वे गांववालों और उनकी समस्याओं को समझने का अच्छा तरीका है। 
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