मंत्री लाल सिंह आर्य पर जातिवाद का आरोप, सपाक्स की फाइल अटकाई | MP NEWS

05 April 2018

भोपाल। राज्य सरकार सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन) को कर्मचारी संगठन के रूप में मान्यता देने से कतरा रही है। मान्यता की मांग को लेकर सपाक्स के पदाधिकारी मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिल चुके हैं। सभी ने मान्यता देने का भरोसा भी दिया है, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग फाइल अटकाए हुए है। इसे लेकर सपाक्स में नाराजगी है। संगठन का कहना है कि मंत्री के इशारे पर मान्यता नहीं दी जा रही है। जबकि मंत्री आरोपों का खंडन करते हैं। वे कहते हैं कि लोगों को भ्रम है।

पदोन्न्ति में आरक्षण के मुद्दे से दो साल पहले अस्तित्व में आया सपाक्स एक साल से सरकार से मान्यता मांग रहा है। संगठन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा और सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लाल सिंह आर्य से भी मिल चुके हैं, सभी मान्यता देने का आश्वासन भी दे चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि नवंबर 2017 से मान्यता की फाइल विभागीय मंत्री आर्य के बंगले पर पड़ी है। संगठन को न तो मान्यता दी जा रही है और न ही स्पष्ट रूप से मना किया जा रहा है।

उधर, संगठन का तर्क है कि जातिगत आधार पर प्रदेश में एक कर्मचारी संगठन (अजाक्स) को मान्यता दी जा सकती है, तो अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी संगठन को मान्यता देने में क्या दिक्कत हो सकती है। पदाधिकारी कहते हैं कि शायद अनारक्षित वर्ग को संगठित और सशक्त नहीं होने देने की रणनीति है। सूत्र बताते हैं कि मान्यता के लिए आवेदन करने के तुरंत बाद यह बात आई थी कि किसी संगठन को जाति के आधार पर मान्यता नहीं दी जा सकती, लेकिन जब अजाक्स का उदाहरण प्रस्तुत किया गया, तो सरकार ने आवेदन तो ले लिया, लेकिन मान्यता की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी।

67 फीसदी कर्मचारी
दो साल पहले अस्तित्व में आया यह संगठन वर्तमान में प्रदेश के 67 फीसदी कर्मचारियों (अनारक्षित) का प्रतिनिधित्व करता है। वर्तमान में प्रदेश में साढ़े चार लाख नियमित कर्मचारी हैं। जबकि करीब 10 लाख निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाएं, निकाय सहित संविदा और अतिथि कर्मचारी हैं।

मान्यता के फायदे
सरकार 'मप्र शासकीय सेवक (सेवा संघ) नियम 1967" के तहत मान्यता देती है। मान्यता का सिर्फ एक ही फायदा है कि मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन से विभाग पत्राचार करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। जबकि गैर मान्यता प्राप्त संगठन पर यह बाध्यता लागू नहीं होती। मान्यता के बाद संबंधित संगठन को सरकार के निर्णयों की सूचना दी जाती है और समय-समय पर सरकार उनसे वार्तालाप करती है।

फाइल मंत्रालय पहुंचने की सूचना
मामला सामने आते ही सूचना आई कि संगठन को मान्यता देने की फाइल प्रशासकीय अनुमोदन के साथ मंत्रालय भेज दी गई है, लेकिन देर शाम तक मंत्रालय के संबंधित अधिकारी नहीं बता पाए कि फाइल कहां है और मान्यता की स्थिति क्या है।

इनका कहना है
मान्यता की फाइल मैंने दबा ली है, यह लोगों का भ्रम है। मैं किसी जाति व्यवस्था में नहीं पड़ता। हम लोग आठों दिन राजधानी में नहीं रहते हैं, क्षेत्र में जाना पड़ता है। फाइल मूवमेंट को देखेंगे, तो भ्रम दूर हो जाएगा। 
लालसिंह आर्य, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 
सामान्य प्रशासन विभाग

संगठन की मान्यता के लिए हम पिछले एक साल से प्रयासरत हैं। हमारी जानकारी के अनुसार मान्यता की फाइल मंत्रालय से विभागीय मंत्री के बंगले पर भेजी गई, जो कई महीनों से वहां लंबित है। जबकि अनौपचारिक मुलाकातों में संगठन को यह भरोसा दिलाया गया था कि संगठन को शीघ्र मान्यता देने की कार्यवाही शासन कर रहा है। 
केएस तोमर, अध्यक्ष, सपाक्स

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