BHOPAL में 40 करोड़ की सरकारी जमीन पर आसाराम का कब्जा | MP NEWS

26 April 2018

भोपाल। आसाराम को जोधपुर कोर्ट ने बलात्कार के मामले में दोषी पाते हुए मरते दम तक जेल में रखने का आदेश सुनाया। इसके बाद भोपाल में आसाराम के नाम पर लगा बस स्टॉप का बोर्ड तोड़ दिया गया। महापौर आलोक शर्मा खुद उस बोर्ड को तुड़वाने गए। अब एक और मामला सामने आया है। गांधी नगर स्थित आसाराम आश्रम की बाउंड्री बाल एयर पोर्ट अथॉरिटी की जमीन पर बनाई गई है। यही नहीं, आश्रम ने करीब 11 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। यह खुलासा प्रशासन की आेर से की गई जांच में हुआ है। उक्त जमीन की कीमत बाजार भाव से करीब 40 करोड़ रुपए से अधिक है।

तहसीलदार कोर्ट से जारी हुए दो अलग-अलग आदेशों में ये माना गया है कि आश्रम में अन्य लोगों की जमीन भी फंसी हुई है। उक्त जमीन के बटान के आदेश भी जारी हुए, लेकिन अब तक भू-स्वामियों को इसका कब्जा देने की कार्यवाही नहीं हुई है। जमीन मालिकों का कहना है कि उन्होंने कब्जा वापस दिलाने के लिए आवेदन किया है, लेकिन अफसर कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।

दिग्विजय सिंह ने दी थी 4 एकड़ सरकारी जमीन
आश्रम के संचालक महावीर भाई का कहना है कि आश्रम की स्थापना 1984 में हुई है। आसाराम ट्रस्ट ने 10 एकड़ भूमि वर्ष 1984 में दिगम्बर राजदेव से क्रय की और एक एकड़ 50 डेसीमल जमीन वर्ष 2000 में राधा भंडारी पति कृष्ण कुमार से क्रय की, 4 एकड़ 4 डेसीमल जमीन मध्यप्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक रुपए भू-भाटक दर पर 20 दिसम्बर 2005 में 30 साल की लीज पर मिली। ऐसे में इसकी समय सीमा 2035 तक है।

2013 में की गई थी शिकायत
विवादित भूमि में दो एकड़ 88 डेसिमल भूमि रविंद कुमार भंडारी और अश्विनी कुमार भंडारी दोनों भाइयों की है। इसकी पावर ऑफ अटार्नी शैलेष प्रधान के नाम है। एक एकड़ से अधिक एयर पोर्ट अथॉरिटी की। जबकि, 10 एकड़ भूमि गोंदरमऊ गांव के निस्तार की सरकारी भूमि है। उक्त अतिक्रमण की शिकायत शैलेष प्रधान ने 2013 में जिला प्रशासन को की थी। इसकी जांच में अतिक्रमण होना पाया गया है।

आश्रम में संचालित हो रहा है स्टोर
आसाराम आश्रम में जनरल स्टोर संचालित किया जा रहा है। साधक प्रशांत का कहना है कि यहां गुजरात के अहमदाबाद से किराना, जनरल स्टोर, दवाई, समेत अन्य सामान लाकर बेचा जाता है। इससे होने वाली आय से आश्रम के खर्चे पूरे किए जाते हैं।

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भूमि से संबंधित मामला राजस्व न्यायालय ग्वालियर में विचाराधीन है। अतिक्रमण मामले पर हाईकोर्ट का स्टे हैं। हमने स्टे ब्रेकेट कराने की कार्रवाई की हुई है। आदेश आते ही कार्यवाई की जाएगी। - अजय पटेल, तहसीलदार, बैरागढ़, भोपाल

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