हड़ताली संविदा कर्मचारियों ने कहा: घंटे पे आदेश | MP NEWS

27 March 2018


भोपाल। मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों की हड़ताल जारी है। हड़ताल समाप्ति के लिए अपील की जा रही है लेकिन सभी बेअसर। इधर एनआरएचएम द्वारा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को दिए गए तीसरे अल्टीमेटम का आज आखरी दिन था। कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटे। उल्टा जबलपुर में हड़ताली कर्मचारियों ने एक बैनर टांग दिया जिस पर लिखा है 'घंटे पे आदेश'। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मप्र के प्रांताध्यक्ष सौरभ सिंह चौहान ने हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है। 

बता दें कि इसके पहले दो बार एनआरएचएम ने नोटिस देकर काम पर लौटने को कहा था, लेकिन आंदोलनकारियों का साफ कहना है, जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी काम पर नहीं लौटेंगे। इसके बाद तीसरा अल्टीमेटर जारी किया गया जिसकी अवधि समाप्त हो गई है जबकि हड़ताल जारी है। 

19 मार्च से कर रहे आंदोलन
संविदा स्वास्थ्यकर्मी 19 मार्च से सामूहिक हड़ताल पर हैं। वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अब तक वे रैली, धरना, फांसी, जल सत्याग्रह, बर्तन बजाना, सीटी बजाना, काली पट्टी बांधना, चुनरी यात्रा निकालना, भीख मांगना, अर्थी निकालना जैसे प्रदर्शन किए हैं। सरकार द्वारा कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। 

संविदाकर्मी बोले, सरकार के पास हमें देने के लिए रुपए नहीं इसलिए मांग रहे भीख
इंदौर में आंदोनलकारी भीख मांगने के लिए सड़क पर भी उतर चुके हैं। भीख मांगकर विरोध जताने के सवाल पर उनका कहना था कि हम एक महीने से ज्यादा समय से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आ रहा है। सरकार के पास हमें देने के लिए रुपए नहीं हैं, इसलिए भीख मांग रहे हैं। ये रुपए हम सरकार को देंगे।

नहीं लौटेंगे काम पर, चाहें तो नौकरी से निकाल दें
सरकार की अनदेखी और एनआरएचएम द्वारा दिए जा रहे अल्टीमेटम के जवाब में स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि हम अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। एनआरएचएम ने हमें नौकरी से निकालने के लिए नोटिस दिया है। सरकार चाहे तो हमें निकाल दे, लेकिन हमारी मांगें पूरी होने के बाद ही आंदोलन खत्म होगा। 

सरकार के लिए क्या मायने रखते हैं संविदाकर्मी
मप्र की स्वास्थ्य व्यवस्था आंदोलन कर रहे ढाई लाख संविदाकर्मियों के जिम्मे है।
इनके हड़ताल पर जाने की वजह से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कई सेवाएं ठप हो गई हैं।
किसी भी जांच के लिए मरीज के परिजनों को स्वास्थ्यकर्मी का जिम्मा उठाना पड़ रहा है। 
कुछ अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में नर्सिंग कर रहे स्टूडेंट से काम लिया जा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में तो वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्टाफ नहीं होने से लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यदि इन्हें काम से निकाला गया तो सरकार को तत्काल अस्पतालों के लिए नई व्यवस्था करनी होगी।
गर्मी के साथ ही आने वाले दिनों में टीकाकरण के साथ ही सरकार की कई स्वास्थ्य योजनाएं संचालित होने वाली हैं ऐसे में स्टाफ की जरूरत होगी।
इसके अलावा ढाई लाख स्वास्थ्यकर्मियों के वोटों को देखा जाए तो एक के पीछे चार लोग हो सकते हैं ऐसे में इनके करीब 10 लाख वोट हैं, जो नाराज होने पर सरकार से दूर जा सकते हैं। 

संविदाकर्मकियों की ये हैं मांग
नियमितिकरण के साथ ही अप्रेजल प्रक्रिया बंद करने और निष्कासित संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को बहाल किया जाए।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खाली पदों पर संविलियन करें।
समान वेतनमान किया जाए।

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