सतना खनन घोटाला: मुख्य सचिव खुद करेंगे जांच

08 March 2018

भोपाल। सतना जिले के दो गांव सुनोरा और सांल में सरकारी जमीन पर खनन के जरिए 1000 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप की जांच अब खुद मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह करेंगे।। आरोप है कि रिकार्ड में हेरफेर कर भू-माफिया ने पट्टे के माध्यम से जमीन अपने नाम कर ली। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और लोक अभियोजक के बार-बार कहने के बाद एफआईआर नहीं हो रही है। माना जा रहा है कि स्थानीय प्रशासन इस घोटाले में शामिल है। मामला विधानसभा में उठाया गया था। राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने सदन में माना कि सवालों का अध्ययन करने के बाद लग रहा है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है, इसलिए नोटिस दिए हैं। अब तक औपचारिकता हुई है, कार्रवाई नहीं। संभागायुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाकर जांच कराएंगे। नेता प्रतिपक्ष इस पर सहमत नहीं हुए तो राजस्व मंत्री ने मुख्य सचिव से जांच कराने का आश्वासन दिया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष ने प्रश्नकाल में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि सतना कलेक्टर संतोष मिश्रा ने 2016 में पत्र लिखा था कि सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द किया गया है। राजस्व अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से दर्जनों गांवों की जमीन के नक्शे गुम हो गए। कई जगहों पर फर्जी नक्शे और भू-अधिकार अभिलेख को प्रचलित कर दिया। इसके मद्देनजर अनुविभागीय अधिकारियों की अध्यक्षता में विशेष जांच समिति गठित की गई थी। समिति को तीन माह में प्रतिवेदन देना था।

लोक अभियोजक ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दोनों को लिखा कि आरोपी रामानंद सिंह, शिवभूषण सिंह, रामशिरोमणी सिंह, मनोज श्रीवास्तव सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाए लेकिन किसी के ऊपर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। सुनोरा और सांज शहर से लगे गांव हैं। 16 टन की जगह 40-40 टन के ट्रक निकल रहे हैं। भयंकर माइनिंग हो रही है। यह दो तहसील के दो गांव में एक हजार करोड़ रुपए का घपला है। इसकी विधायकों की सर्वदलीय समिति बनाकर जांच की जाए।

राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि प्रश्नों का अध्ययन करने के बाद लग रहा है कि गड़बड़ जरूर है। संभागायुक्त से पूरे जिले के ऐसे मामलों की जांच कराएंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि कलेक्टर के पत्र की जानकारी मेरे पास नहीं है लेकिन लिखा है तो उस भी कार्रवाई होगी। हमें जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है। जो विधायक इसमें शामिल होना चाहें हम शामिल कर देंगे।

इस पर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि हमें जांच में शामिल होने में कोई रूचि नहीं है। जिले के भाजपा, कांग्रेस और बसपा विधायकों की समिति बनाकर जांच करा दें, हकीकत पता चल जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, मुकेश नायक ने भी विषय को गंभीर बताया। राजस्व मंत्री जब सर्वदलीय समिति के लिए सहमत नहीं हुए तो अजय सिंह ने मुख्य सचिव से जांच कराने के लिए कहा, जिस पर वे राजी हो गए।

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