CM ने कहा था आहते बंद करेंगे, इसलिए अब बार के लाइसेंस देंगे | MP NEWS

Tuesday, December 19, 2017

भोपाल। शिवराज और शराब की लुकाछिपी पिछले 12 साल से जारी है। शिवराज सिंह ने पहली बार सीएम पद की शपथ लेने के बाद कहा था मप्र में एक नई शराब की दुकान नहीं खुलेगी। जनता ने समझा धीरे धीरे जो हैं वो भी बंद कर दी जाएंगी लेकिन अधिकारियों ने एक लाइसेंस पर 4-4 दुकानें चलाने की मौखिक परमिशन दे दी। पूरे प्रदेश में यहां तक कि गांव में राशन की दुकानों तक पर शराब मिलने लगी। अब सीएम ने ऐलान किया है कि मप्र में सभी आहते बंद कर दिए जाएंगे। अधिकारियों ने उन सभी आहतों को बीयर बार में बदलने की तैयारी कर ली है। शिवराज सिंह की घोषणा का ऐसा चीरहरण शायद ही पहले कभी हुआ हो। 

1 अप्रैल-2018 से लागू होने वाली नई नीति में बार और रेस्त्रां को दिया जाने वाला लाइसेंस एफएल-2 खत्म किए जाने का प्रस्ताव है। यानी, जिनके पास शराब दुकान का लाइसेंस नहीं है ऐसे रेस्त्रां और बार में शराब नहीं परोसी जा सकेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 नवंबर को रेडियो पर दिल की बात करते हुए शराब के अहातों को बंद करने की घोषणा की थी। सूत्रों का कहना है कि अहाते बंद होंगे, लेकिन सिर्फ देशी शराब के। अंग्रेजी वाले बार का लाइसेंस ले सकेंगे। बस अंग्रेजी शराब के दुकानदारों को अपने अहातों में प्रसाधन समेत छोटे-मोटे बदलाव करने होंगे। नई आबकारी नीति में लाइसेंस की नई कैटेगरी एफएल-2ए बनाई जा रही है। यह केवल शराब दुकान चलाने वाले ठेकेदारों को ही मिलेगा। 


नई नीति में क्या 
एफएल-1,एफएल-3 और एफएल-4 लाइसेंस मिलते रहेंगे। एफएल-2 खत्म किया जा रहा है। इसकी जगह एफएल-2ए दिया जा रहा है। यह लाइसेंस विदेशी शराब की दुकान लेने वाले उन ठेकेदारों को मिलेगा जो अपने अहाते में शराब पिलाते हैं। 

होटल एसोसिएशन नाराज
बार संचालक नई नीति के प्रस्ताव के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव से मुलाकात भी की। होटल संचालक एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली का कहना है कि प्रस्तावित नियमों से केवल शराब ठेकेदारों को ही लाभ पहुंचेगा। वे अपनी सभी शराब की दुकानों के बाहर लाइसेंस लेकर अहाते बना लेंगे। ऐसे में सभी बार बंद हो जाएंगे। खुले अहातों के आसपास बड़ी संख्या में लोग पीने के बाद हंगामा करते हैं। कानून व्यवस्था के लिहाज से भी यह ठीक नहीं होगा। 

एफएल-2ए पर विचार हुआ है। इसके साथ अन्य विषयों पर भी विचार चल रहा है। अभी इसके लिए नियम और शर्तों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। 
अरुण कोचर, आबकारी आयुक्त, मप्र सरकार 

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