अमेरिका ने चुरा ली भारत के आधार कार्डों की डीटेल्स: विकीलीक्स का खुलासा

Saturday, August 26, 2017

नई दिल्ली। विकिलीक्स ने ट्वीट्स कर कहा है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने भारत के नेशनल आईडी कार्ड डाटाबेस आधार को चुरा लिया है। सीआईए (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) ने इस साइबर जासूसी के लिए अमेरिका की टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर कंपनी क्रॉस मैच टेक्नोलॉजीज द्वारा तैयार टूल डिवाइस का इस्तेमाल किया है। हालांकि भारत में ऑफिशियल सोर्सेज ने इस दावे को खारिज कर दिया है। विकिलीक्स ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर शुक्रवार को 2 ट्वीट कर आधार डाटा चोरी किए जाने की जानकारी दी। इनके मुताबिक इस साइबर जासूसी के लिए टेक्नोलॉजी ईजाद करने वाली क्रॉस मैच वही अमेरिकी कंपनी है, जिसने आधार की रेगुलेटरी बॉडी यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) को बायोमीट्रिक टेक्नोलॉजी अवलेबल कराया है। क्रॉस मैच का भारत में ऑपरेशन स्मार्ट आईडेंटिटी डिवाइसेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप है। इसी कंपनी ने देश भर के 1.2 मिलियन (12 लाख) भारतीयों के आधार कार्ड के लिए डाटाबेस जुटाए थे।

विकिलीक्स ने क्या ट्वीट किए?
विकिलीक्स ने दो ट्वीट किए। पहले ट्वीट में लिखा, "क्या सीआईए के जासूसों ने भारत के नेशनल ID कार्ड डाटाबेस को चुरा लिया है? दूसरे ट्वीट में लिखा, "देखें जासूसों के हाथ में आधार।" विकिलीक्स ने इसके साथ ही एक मैगजीन में छपे आर्टिकल का लिंक भी शेयर किया है, जिसे गोविंद कृष्णन नाम के किसी शख्स ने लिखा है।

ये विकिलीक्स का खुलासा नहीं: ऑफिशियल सोर्सेज
हालांकि भारत में ऑफिशियल सोर्सेज ने इस दावे को खारिज कर दिया है। ऑफिशियल सोर्सेज ने कहा कि ये विकिलीक्स का खुलासा नहीं है बल्कि एक वेबसाइट द्वारा बताया गया लीक है। सोर्सेज ने कहा कि क्रॉस मैच बॉयोमीट्रिक डिवाइस बनाने वाली कंपनी है जो पूरे विश्व में इस तरह के डिवाइस सप्लाई करती है। जो भी वेंडर आधार का डाटा कलेक्ट करते हैं वो इनक्रिप्टेड फॉर्म में आधार सर्वर को ट्रांसफर हो जाता है। वास्तव में इन रिपोर्ट्स का कोई आधार नहीं है। आधार डाटा पूरी तरह सेफ है और इसे किसी दूसरी एजेंसी को देखने का अधिकार नहीं है।

क्या है विकिलीक्स?
ये वेबसाइट अपने खुलासों के लिए दुनियाभर में फेमस है। विकिलीक्स अपने सीक्रेट डॉक्युमेंट्स को ऑनलाइन पब्लिश करने के लिए चर्चित है। ऑस्ट्रेलियाई मूल के जूलियन असांजे विकीलीक्स के फाउंडर, एडिटर और इंटरनेट एक्टिविस्ट हैं। 2006 में शुरू इस वेबसाइट का सबसे ज्यादा शिकार अमेरिका बना है। विकिलीक्स ने अमेरिका-इराक जंग से जुड़े लाखों डॉक्युमेंट्स को पब्लिक कर अमेरिका को मुश्किल में डाल दिया था।

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