फ्री पास से टिकट बनवाकर रेलवे को चूना लगा रहे हैं कर्मचारी

Saturday, July 8, 2017

रियायती पास के जरिए रेलवे को उसके ही कर्मचारियों ने लाखों का चूना लगा दिया है। रेलवे अपने कर्मचारियों को मुफ्त पास देता है नियम के मुताबिक एक पास पर एक बार ही टिकट बनवाया जा सकता है, लेकिन कई कर्मचारियों ने न केवल दर्जनों टिकट बनवाए बल्कि दूसरे यात्रियों को भी पास के जरिए टिकट बेचे। ये रेलवे कर्मचारी अब विजिलेंस के रडार पर आ गए हैं। यह फर्जीवाड़ा झांसी रेल मंडल के अलावा उत्तर मध्य रेलवे के अन्य मंडलों सहित उत्तर रेलवे के दिल्ली, लखनऊ,वाराणसी, मुरादाबाद, अम्बाला मंडल में भी पकड़ा गया है। उत्तर रेलवे में ऐसे 80 रेलवे कर्मचारी विजिलेंस जांच में फंसे हैं। अकेले झांसी रेल मंडल से सात बुकिंग क्लर्क और करीब बीस कर्मचारियों के नाम इस फर्जीवाड़े में सामने आए हैं। इसमें ग्वालियर में पदस्थ रहे दो बुकिंग क्लर्क भी हैं।

रेलवे कर्मचारियों को एक साल में तीन मुफ्त पास दिए जाते हैं, इस पर वह परिवार के साथ कहीं भी सफर कर सकते हैं। सफर के लिए उन्हें पास दिखाकर रिजर्वेशन काउंटर से रिजर्व टिकट बनवाना होता है। एक पास पर एक बार ही टिकट बनाया जाता है। लेकिन बुकिंग क्लर्कों की मिलीभगत से कुछ रेलवे कर्मचारियों ने एक-एक पास पर दर्जनों बार रिजर्वेशन करवाए। ऐसा भी सामने आया है कि यह लोग अपने पास पर रिजर्वेशन करवाकर इन्हें बेच भी रहे थे। यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था।

कुछ महीने पहले जब क्रिस(सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम) द्वारा सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी अपडेशन किया जिससे यह पता लग सके कि किसी पास पर कितनी बार टिकट बने तब यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। इसके अलावा विजिलेंस को भी लगातार शिकायत मिल रही थी कि रेलवे के रियायती पास पर एक से अधिक बार टिकट बनाए जा रहे हैं। उत्तर रेलवे के एक कर्मचारी ने तो एक पास पर 56 बार टिकट बनवाए। वहीं दिल्ली में पदस्थ एक कर्मचारी ने 30 बार टिकट बनवाए। ग्वालियर के जो बुकिंग क्लर्क जांच में फंसे हैं, उन्होंने टिकट बनाए थे। इसलिए उन पर गाज गिरी है।

मिलीभगत से हुआ फर्जीवाड़ा नियमानुसार रेलवे पास पर कर्मचारी एक ही बार यात्रा कर सकता है। इसके लिए जब कर्मचारी रिजर्वेशन काउंटर पर टिकट बनवाने जाएगा तो उसके पास की फोटोकॉपी बुकिंग क्लर्क जमा करेगा और अोरिजिनल पास देखेगा, साथ ही पास पर हस्ताक्षर कर एंट्री करेगा, जिससे दूसरा टिकट न बन सके।

यहीं फर्जीवाड़ा हुआ। बुकिंग क्लर्कों ने पास की फोटोकॉपी ली नहीं और सिर्फ नंबर के आधार पर टिकट बनवा दिए। उस पास पर कर्मचारियों ने एक टिकट किसी रिजर्वेशन काउंटर से तो दूसरा टिकट अन्य रिजर्वेशन काउंटर से बनवा लिया। क्लर्क द्वारा पास पर एंट्री भी नहीं की गई। विजिलेंस जांच में तो यहां तक सामने आया है कि कुछ बुकिंग क्लर्कों ने फोन पर ही नंबर नोट कर टिकट बना दिए जिन कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर विजिलेंस ने दोषी बताया है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
नीरज शर्मा, मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे

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