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मप्र के पहली दिव्यांग और मूक बधिर महिला ने ASIAN CHAMPIONSHIP में जीता कांस्य पदक

प्राची नारायण मिश्रा/सिहोरा। जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील की ग्राम कुर्रे पिपरिया निवासी जानकी ने उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगऔर मूक-बधिर जूडो एशियन चैंपियनशिप-2017 मे आयोजित भारतीय महिला टीम ने कांस्य पदक पर कब्जा जमाया है। जिसमे सिहोरा के ग्राम कुर्रे पिपरिया की दिव्यांग जानकी गौंड के भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए टीम ने यह सफलता प्राप्त करते हुए मध्यप्रदेश और जिले का नाम रोशन किया है। इस चैंपियनशिप में मंगलवार को खेले गए मैच में थाईलैंड, कोरिया और उज्बेकिस्तान को हराकर भारतीय टीम कांस्य पदक जीता है।

14 सदस्यी टीम का किया नेतृत्व
जानकी गौंड (30वर्ष) ने 22 से 29 मई तक उज्बेकिस्तान में आयोजित एशियन जूडो चैम्पियनशिप में  नेतृत्व करते हुये प्रियंका अन्ना साहेब घूमरे (महाराष्ट्र), प्रीति चेन्नास्वामी (तमिलनाडु) की महिला टीम ने सीमा रानी और भगवानदास कोच के साथ 14 सदस्यीय दिव्यांग और मूक बधिर खिलाड़ियों के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया। भारतीय जूडो टीम के कोच भगवानदास ने बताया कि टीम ने मंगलवार को प्रतियोगिता में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुये कांस्य पदक प्राप्त किया है। कांस्य पदक विजेता टीम का नेतृत्व सिहोरा की जानकी ने किया है जो इसके पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक 2016 मे और 2017 में ही गोल्ड मेडल जीत कर लगातार प्रदेश और जिले का नाम रोशन की हैं। 

मप्र की पहली महिला खिलाड़ी
सिहोरा की जानकी गौंड (30वर्ष) मप्र की पहली दिव्यांग और मूकबधिर जूडो खिलाड़ी हैं जो अलग अलग स्तरों पर खेलते हुए रजत पदक, स्वर्ण पदक और एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर मप्र और जबलपुर जिले का नाम रोशन किया है।

घर का काम के बाद अभ्यास
जिस तरह से जानकी ने अपनी लगन के आगे सभी परिष्तिथियों का सामना करते हुये यह सफलता प्राप्त की है उससे यह कहना अतिशियोक्ति नही होगी कि यदि किसी में प्रतिभा है और उसे दिखाने की लगने है तो गरीबी कभी आड़े नही आ सकती है। जिसे सच साबित करके सिहोरा की जानकी गौंड ने कर बताया है जो दिव्यांग और मूक बधिर तो है ही साथ ही घर का पूरा काम भी करती है और जो थोड़ा बचा हुआ समय मिलता है उसी में जूडो का अभ्यास भी कर लेती है। जिसके पास न तो फीस भरने को और न ही किराया तक को पैसे थे लेकिन उसकी लगने और जीतने की जिद के जज्बे की वजह से यह सफलता हासिल की है जो दूसरे लोगों के लिये प्रेरणा भी है।

बहुत ही गरीब परिवार से है जानकी
सिहोरा की जानकी गौंड जिसके पास न तो किराया के लिये पैसे थे और न् ही बेहतर ट्रेनिग लेने के लिये फीस भरने में सक्षम थी ! जिसका चयन अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में हो तो गया थालेकिन उसके पास वीजा और आने जाने के लिये पास में रुपये ही नही थे तभी समाजिक संस्थायें तरुण संस्कार और साइटसेवर्स जानकी की मदद करके चैंपियनशिप में पहुंचने तक मदद की। जिसमें करीब 80 हजार की राशि जमा हुई थी  जिसके बाद सिहोरा की जानकी उज्बेकिस्तान के  ताशकंद में आयोजित चैंपियनशिप मे भारतीय टीम का हिस्सा बनकर टीम का नेतृत्व भी किया। संस्था के राकेश सिंह ने बताया कि जानकी 30 मई को दिल्ली पहुचेंगी और दिल्ली से संपर्क क्रांति ट्रेन से जबलपुर पहुंचेंगी । जिनके स्वागत की तैयारियां नगर के लोगों ने कर रखी है।