नई दिल्ली। आम बजट 2016 में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से निकासी पर टैक्स लगाने के विवादास्पद प्रस्ताव पर सरकार ने एक और विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है, वहीं शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस कदम से तुरंत पीछे हटने की कोई संभावना नहीं है।
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार सुबह बीजेपी सांसदों की एक बैठक में इस कदम पर जानकारी देने के साथ ही कहा था कि इस कदम को वापस लिए जाने पर कोई भी फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही लेंगे, जिससे संकेत मिलता है कि एक ओर जहां सरकार फिलहाल अपने फैसले पर टिकी हुई है, वहीं वह माहौल पर भी बारीकी से नज़र रखे हुए है।
ईपीएफ से निकासी पर टैक्स लगाए जाने के इस कदम का आम लोगों और राजनैतिक पार्टियों की तरफ से चौतरफा विरोध हो रहा है। वित्तमंत्री ने मंगलवार को कहा कि इस कदम के पीछे एक पेंशनभोगी समाज बनाने का विचार है, खासतौर से निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए, जिनके पास पेंशन की कोई सुविधा फिलहाल नहीं है।
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में स्पष्ट किया है कि नए नियम के अंतर्गत भविष्य निधि की पूरी रकम करमुक्त रह सकती है, यदि सेवानिवृत्ति के समय सिर्फ 40 फीसदी रकम को निकाला जाए, और शेष 60 फीसदी रकम को पेंशन फंड में निवेश कर दिया जाए।