अनूपपुर। सेवानिवृत्त कर्मचारी के सुसाइड के मामले में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि मृतक मुरली सिंह को उसकी बेटी के दामाद ने लाखों का चूना लगाया था, जिससे वो परेशान रहने लगे थे। इसी परेशानी के चलते उन्होंने ये खौफनाक कदम उठा लिया. वहीं भाजपा नेता होने के कारण पुलिस अब तक दामाद को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
जानकारी के अनुसार, एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र निवासी मुरली सिंह रिटायर्मेंट के पैसे से अपना जीवन चला रहे थे. इस बीच उनकी बेटी के दामाद संतोष सिंह परमार ने मुरली से सेवानिवृत्त के बाद लाइफ इंश्योरेंस में जमा करवाने के लिए ढाई लाख रुपए ले लिए और उन्हें बदले में
नकली बांड थमा दिए
इसके बाद संतोष ने अपने एक परिचित दुकानदार को भी मुरली सिंह से ढाई लाख रुपए उधार दिलवा दिए. जब मुरली अपने पैसे वापस मांगने गए तो उन्हें बार-बार खाली हाथ लौटना पड़ता. इस बीच उन्हें बांड नकली होने के बारे में भी जानकारी मिली. जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी के दामाद से पैसे मांगना शुरू कर दिए, लेकिन उसने उन्हें पैसे लौटाने से इनकार कर दिया.
अपने साथ हुए इतने बड़े धोखे के बाद मुरली सिंह तनाव में रहने लगे थे और उनकी मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ने लगा था. उनकी हालत ये हो गई थी कि वो नींद में भी अपने पैसे वापस मांगते हुए चिल्लाकर उठ जाते थे. इस धोखाधड़ी के बारे में उन्होंने भालूमाड़ा थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई थी, पर संतोष के भाजपा पार्टी मंडल पसान के उपाध्यक्ष होने के कारण उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई.
मुरली सिंह के द्वारा 6 मार्च को ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या करने के चार दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई है. परिजनों का आरोप है कि आरोपी के भाजपा नेता होने के कारण उसे बचाया जा रहा है, जिस वजह से वो अभी भी सलाखों से दूर है. वहीं पुलिस इस मामले में कुछ भी खुलकर कहने से बचती नजर आ रही है.