युवती पर थूका, कपड़े फाडे, बाल पकड़ घसीटा

मुंबई। मणिपुर की एक 26 वर्षीय युवती पर सांता क्रूज़ इलाके में हमला किया गया। आरोप के मुताबिक छेड़छाड़ की गई, पेट में लात मारी गई, बाल पकड़ कर घसीटा गया लेकिन कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। यहां तक कि पुलिस भी हाथ पर हाथ धर कर बैठी रही। युवती ने एफआईआर दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। शिकायत भी दर्ज़ की तो गैर संज्ञेय अपराध (एनसी) में। यहां तक कि दर्ज़ की गई शिकायत में भी कहीं छेड़छाड़ का उल्लेख नहीं किया गया। जबकि युवती ने अपने फटे हुए कपड़े तक पुलिस अधिकारी को दिखाए थे। 

बताया गया है कि ये युवती मुंबई में पिछले 5 साल से रह रही थी और मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम करती थी। युवती और उसकी बहन कालीना के कोलिवेरी गांव में रहती हैं। बीते शनिवार को युवती अपनी सहेली के साथ साम को साढ़े छह बजे बाहर निकली थीं। पाम विला सोसाइटी में एक अज्ञात व्यक्ति ने पहले युवती पर थूका। जब युवती ने आपत्ति जताई तो वो व्यक्ति उसे पीटने लगा।

'मिडडे' की रिपोर्ट के मुताबिक युवती ने बताया, "उसने मुझे मारा, मेरे पेट में लात मारी, जब मैंने विरोध किया तो वो मुझसे छेड़छाड़ करने लगा। मेरे कपड़े तक फाड़ दिए। मैं गिर पड़ी। तब उसने मुझे बालों से पकड़ा और गली में कुछ मीटर तक घसीटते ले गया।"

युवती की सहेली ने उसे बचाने की कोशिश की तो उसे भी धक्का दे दिया। कोई भी युवती की मदद के लिए आगे नहीं आया। युवती की बहन ने कहा कि "ये पहला मौका नहीं है जब उन्हें नार्थ ईस्ट जैसा चेहरा-मोहरा रखने के लिए भेदभाव का सामना करना पड़ा। लोग समझते हैं कि हम चीन या नेपाल से हैं। भेदभाव की वजह से कोई हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया। यहां तक कि जिस दुकानदार से हम सामान लेते हैं वो भी चुपचाप बैठ कर सब देखता रहा।"

युवती की बहन ने कहा, "ये सब अमानवीय और दर्दनाक था। इस घटना के बाद मैं और मेरी बहन बाहर निकलते हुए असुरक्षित महसूस करते हैं। मैं नही समझती कि मुंबई अब महिलाओं के लिए सुरक्षित बचा है। ये भी दिल्ली जैसा हो गया है।"

घटना के बाद युवती पुलिस कंट्रोल रूम को तत्काल सूचित किया। लेकिन जब तक पुलिस पहुंची हमलावर भाग चुका था। युवती शिकायत करने वकोला पुलिस स्टेशन पहुंची तो उसका अनुभव खराब रहा।

युवती ने कहा कि उसने सब इंस्पेक्टर संजय पवार को सब बताया और एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा। साथ ही फटे कपड़े भी दिखाए। पवार ने उसे शिकायत की कॉपी देकर घर जाने के लिए कहा। पुलिस अधिकारी ने ये भी कहा कि आरोपी को जल्दी ही पकड़ लिया जाएगा। साथ ही कहा कि अगर ऐसा फिर कुछ होता है तो शिकायत की कॉपी लेकर थाने में आ जाए।

युवती ने कहा कि "मैं मराठी नहीं जानती, इसलिए पता नहीं कि पुलिस अधिकारी ने शिकायत में क्या लिखा। मुझे ऐसे ही लगा कि एफआईआर लिखी गई लेकिन मुझे तब झटका लगा जब मुझे मेरी बहन ने बताया कि ये एफआईआर नहीं सिर्फ शिकायत है।"

मिडडे ने इस बात की पुष्टि की शिकायत केवल आईपीसी की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 504 (इरादतन अपमान) के तहत ही दर्ज़ की गई। इसमें कहीं भी युवती से छेड़छाड़ का उल्लेखन नहीं किया गया।

घटना के तीन बाद भी पुलिस आरोपी का सुराग नहीं लगा सकी है। दोनों बहनों ने इस मामले में नॉर्थ ईस्ट समुदाय और माई होम इंडिया नामक एनजीओ से मदद की गुहार लगाई है। जब एनजीओ के प्रतिनिधि थाने गए तो उन्हें बताया गया कि आरोपी बेंगलुरू भाग गया है।

इस बीच सब इंस्पेक्टर संजय पवार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, "मैंने शिकायत सही तरीके से दर्ज की थी। युवती के कपड़े पूरी तरह नहीं फटे थे। शिकायत में जो तथ्य बताए गए थे वो एफआईआर के लिए फिट नहीं थे इसलिए एनसी लिखी गई। मैंने आरोपी को पकड़ने के लिए अभियान भी चलाया लेकिन वो घटना वाले दिन ही घर से भाग गया था।"
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