
इसलिए इस साल 15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति
सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है, तो उसी तिथि के दिन मकर संक्रांति के नाम से यह त्योहार मनाया जाता है। खगोलशास्त्र के अनुसार, यह एक सामान्य प्रक्रिया हुआ करती है। उनके अनुसार मकर संक्रांति तिथि के बाद से ही रात की तुलना में दिन की अवधि बढ़ने लगती है। इस वर्ष 14 जनवरी के दिन उत्तररात्रि में 1 बजकर 26 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का काल रात्रि में पड़ने से मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी के दिन पड़ रहा है, इसलिए इस साल यह त्योहार 15 जनवरी के दिन मनाया जाने वाला है।
157 साल बाद 1 दिन, 400 साल बाद 3 दिन आगे
सोमण के अनुसार, जिस काल में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, ठीक उसी काल या क्षण से लेकर अगले साल यानी 365 दिन, 6 घंटे, 9 मिनट और 10 सेकंड बाद अगली मकरसंक्रांति का त्योहार पड़ता है। हर साल 9 मिनट 10 सेकंड का यह समयकाल इकट्ठा होते जाता है और इस तरह हर 157 साल बाद मकर संक्रांति का त्योहार एक दिन आगे बढ़ जाता है।
इसके साथ सोमण ने यह भी बताया कि ग्रेगेरियन कैलेंडर यानी इसवी सन् के जिस साल के शतकपूर्ति (शताब्दी वर्ष) वर्ष में 400 अंक से पूरा भाग नहीं जाता है, उस वर्ष को लीप वर्ष नहीं माना जाता है। हिंदू कैलेंडर और ग्रेगेरियन (इसवी) कैलेंडर के इस समायोजन में हर 400 साल बाद मकर संक्रांति त्योहार एक साथ तीन दिन आगे बढ़ जाता है।
- मनोज मराठे ०८१०९४७०५९५