सरेंडर करना चाहता था दाउद, सरकार ने होने नहीं दिया

नईदिल्ली। भारत में आतंक का दूसरा नाम बना अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम सरेंडर करना चाहता था परंतु सरकार ने ऐसा होने नहीं दिया। क्या आप इसे हाईप्रोफलाइल पॉलिटिक्स कहेंगे कि कुछ लोग ऐसे हैं जो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का डर बनाए रखना चाहते हैं और नहीं चाहते कि वो भारत के कब्जे में आ जाए। खुलासा हुआ है कि ऐसे लोगों में सीबीआई के वरिष्ठ अफसर भी शामिल हैं। यह सनसनीखेज खुलासा सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी और दिल्ली के पूर्व कमिश्नर नीरज कुमार ने किया है।

जून 1994 में बातचीत
1993 से 2002 तक सीबीआई में रहे नीरज कुमार ने दिल्ली से प्रकाशित अखबार 'हिन्दुस्तान' से खास बातचीत में बताया कि जून 1994 उनकी दाऊद से समर्पण के संबंध में तीन बार बात भी हुई थी। कुमार तब इस मामले की जांच कर रहे थे। वह हर आरोप का जवाब देने को तैयार था। मगर उसे इस बात की चिंता थी कि समर्पण के बाद भारत में उसके दुश्मन कहीं उसकी हत्या न कर दें।

बड़े अधिकारियों ने रोका
कुमार ने बताया कि उन्होंने दाऊद से कहा कि सीबीआई उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेगी। मगर वह बात आगे बढ़ाते इससे पहले ही सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया।

लाला ने कराया था संपर्क
कुमार और दाऊद के बीच संपर्क मनीष लाला ने कराया था। लाला दाऊद का कानूनी रणनीतिकार था। कुमार ने बताया कि लाला के पास कोई कानूनी डिग्री नहीं थी मगर उसे कानून की गजब की समझ थी। वह लाला से मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में मिले थे। उन्होंने बताया, 4 जून 1998 को दाऊद के जानी दुश्मन छोटा राजन के गुर्गों ने उसकी हत्या कर दी थी।

मेरे मामले से हटने के बाद भी दाऊद ने मुझसे संपर्क की कोशिश की थी। मगर जब मुझे बात करने की इजाजत नहीं थी तो मैंने भी खुद को बातचीत से दूर कर लिया।
नीरज कुमार, सीबीआई के पूर्व डीआईजी

... जब लाला ने दाऊद से कराई बात
मनीष लाला ने दाऊद से कहा कि मेरे साथ सीबीआई के साहब बैठे हैं। वह सही लगते हैं। आपने जो भी मुझसे कहा है वह उन्हें भी आराम से बता सकते हैं।

उस तक ऐसे पहुंचे
नीरज ने बताया कि दाऊद गैंग के कुछ गुर्गों से पूछताछ में पहली बार मनीष लाला के नाम का खुलासा हुआ। इसके बार उन्होंने लाला के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। बाद में जेजे अस्पताल शूटआउट के एक अन्य मामले में उसने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद वह लाला से मिलने ऑर्थर रोड जेल गए।

व्यवहार का कायल हुआ
कुमार ने बताया, पहली ही मुलाकात में लाला मेरे शालीन व्यवहार का कायल हो गया था। जब वह मुझसे मिला तो मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा। तब लाला ने मुझसे कहा कि पहली बार किसी पुलिस अधिकारी ने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा है। तब लाला ने दाऊद के आत्मसर्मपण करने की इच्छा का खुलासा किया था और कहा था कि वह मुंबई के सीरियल धमाकों में अपनी बेगुनाही साबित करना चाहता है।

दाऊद इब्राहिम के दावे से हैरान थे नीरज कुमार
नीरज कुमार डॉन दाऊद इब्राहिम के इस दावे से हैरान थे जब उसने कहा कि मुंबई के सीरियल बम धमाकों में उसका कोई हाथ नहीं है। जबकि पुलिस के पास दाऊद के खिलाफ सबूतों का अंबार है। मुंबई पुलिस के बाद सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गई थी।

किताब में होगा खुलासा
नीरज कुमार अंडरवर्ल्ड के मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। भारतीय पुलिस सेवा में अपने 37 साल के कार्यकाल के दौरान की 10 शीर्ष तहकीकतों पर वह एक किताब लिख रहे हैं। इस किताब का एक अध्याय उनकी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की बातचीत पर आधारित होगा। इस अध्याय का शीर्षक है ‘डायलॉग विद द डॉन’। यह किताब कुछ समय बाद आएगी।

जेठमलानी को भी फोन
नीरज कुमार से पहले वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी भी दावा कर चुके हैं कि 1993 के धमाकों के बाद दाऊद ने उन्हें भी फोन किया था और आत्मसमर्पण की बात कही थी। मगर उसने यह शर्त भी रखी थी कि मुंबई पुलिस उसे ‘टॉर्चर’ नहीं करेगी और घर में ही नजरबंद रखेगी। मगर सरकार शर्तों के साथ समर्पण के लिए तैयार नहीं हुई थी।
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