भ्रष्टाचार की शिकायत मिलते ही शासन ने प्रमोट कर दिया था रमाकांत द्विवेदी को

shailendra gupta
भोपाल। लोकायुक्त छापे के दौरान 100 करोड़ के कालेकारोबारी ज्वाइंट कमिश्नर रमाकांत द्विवेदी राजस्व विभाग में आने के बाद मालदार नहीं बने बल्कि दतिया में जिला पंचायत के सीईओ रहते हुए भी उन्होंने कई गुल खिलाए थे। वहां इन पर 4 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। जिला पंचायत अध्यक्ष ने जब इसका खुलासा किया तो शासन ने इन्हे प्रमोट कर दिया।

दतिया से आ रहीं खबरों के अनुसार रमाकांत द्विवेदी 2013 में दतिया जिला पंचायत में सीईओ के पद पर आसीन थे। उस समय इन्होने कई शासकीय योजनाओं के फंड का मनमाना उपयोग किया। जिला पंचायत के सदस्यों ने इसकी शिकायत सीएम तक की, नतीजा यह हुआ कि रमाकांत द्विवेदी को प्रमोट कर दिया गया।

दतिया जिला पंचायत अध्यक्ष विशुनसिंह यादव ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि 13वें वित्त आयोग के अंतर्गत परफोरमेंस ग्रांट की राशि वितरण में वर्षवार आबंटन मिलने के बाद भी करीब 4 करोड़ रूपये की हेराफेरी की गई थी, अनुमोदन किये बिना ही राशि गंभीर वित्तीय अनियमितता करते हुये बांटी गई, इसकी शिकायत हुई थी। शासन के निर्देशों का उल्लंघन उक्त अधिकारी खुलेआम करते थे और शिकायत की तो प्रमोशन हो गया।

यहां यह बताना भी जरूरी होगा कि जब रमाकांत द्विवेदी के यहां लोकायुक्त ने छापा मारा तब मध्यप्रदेश शासन उन्हें आईएएस अवार्ड करने की तैयारी कर रहा था।

कुल मिलाकर जितना बड़ा भ्रष्टाचार, उतना ज्यादा प्रमोशन। कम से कम इस मामले में तो मध्यप्रदेश शासन के अफसरों की यही नियत सामने आ रही है।

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