मण्डला। राज्य अध्यापक संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक मण्डला शाम को सम्पन्न हुई जिसमें मुख्यमंत्री की घोषणा कि विस्तार से समीक्षा की गई।
जिला शाखा अध्यक्ष डी.के.सिंगौर ने अध्यापकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमनें लम्बे समय से चुप्पी साधे मुख्यमंत्री की समान कार्य समान वेतन की घोषणा का स्वागत किया है लेकिन वे यदि इसकी आड़ में अध्यापकों के साथ किसी प्रकार का छल करते हैं तो उसका जवाब हम अध्यापक चुनाव में तो देंगें ही लेकिन चुनाव के पहले भी हम प्रदेश में सरकार की किरकरी करने में पीछे नहीं रहने वाले हैं।
अध्यापकों को अप्रैल से संशोधित वेतनमान देने के बाद मुख्यमंत्री के निज सचिव यहीं कहते रहे हैं कि सरकार को अध्यापकों को देने के लिये 2500 करोड़ नहीं है हां 600 करोड़ हैं जिसे वे जैसा चाहे ले लें। आज सरकार उन 600 करोड़ से समान कार्य समान वेतन की पहली किस्त जुलाई 13 से क्यों नहीं दे रही है। अध्यापक संविदा संयुक्त मोर्चा ने सरकार को 2 किस्तों में समान वेतन देने पर अपनी सहमति दी थी। यदि सरकार के पास इस वित्तीय वर्ष में बजट नहीं है तो वह इस वर्ष 1 किस्त दे और अगले वित्तीय वर्ष में पूरी तीन किस्ते एक साथ दे। मुख्यमंत्री जी ने यह कहा है कि वे 4 साल में अध्यापकों को समान काम का समान वेतन दे देंगें। यह बात तभी सार्थक होगी जब मुख्यमंत्री अभी यह आदेश जारी करें कि 2016 के बाद कभी भी अध्यापकों के और शिक्षकों के वेतन में कोई अन्तर नहीं होगा चाहे 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हों या 8वें की।
अब हमारा पूरा ध्यान अध्यापकों के समान कार्य समान वेतन के लिये होने वाले आदेश पर होना चाहिये, आदेश शीघ्रातिशीघ्र जारी हों और उसमें विषगंति हो तो आचार संहिता के पहले उसे दूर की जावे। संघ के सचिव रवीन्द्र चैरसिया ने कहा कि आदेश में यह भी उल्लेखित होना चाहिये कि किस्तों के पूरा होने तक समय समय पर मिलने वाली अन्य परिलब्ध्यिों का लाभ भी मिलता रहेगा।
संघ के जिलाशाखा अध्यक्ष ने उपस्थित अध्यापक साथियों को आश्वस्त किया कि वे इस सम्बंध प्रांताध्यक्ष मुरलीधर पाटीदार व ब्रजेश शर्मा से चर्चा करेंगें। तात्कालिक रूप से निर्णय लिया गया कि रविवार को पूरे जिले के अध्यापक अपने अपने ब्लाक के मुख्यालय में एकत्रित होकर मुख्यमंत्री के नाम पोस्ट कार्ड लिखकर अपील करेंगें कि दो किस्तों में समान कार्य का समान वेतन नहीं तो वोट भी नहीं।