RTE स्टूडेंट्स से भेदभाव हो तो रद्द करो स्कूल की मान्यता

shailendra gupta
भोपाल। शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों के साथ भेदभाव की शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) तीन दिन में संबंधित स्कूल के खिलाफ कारर्वाई करेंगे। यह कार्रवाई संबंधित क्षेत्र के जन शिक्षक की सूचना पर आरटीई के तहत की जाएगी। 

स्कूल शिक्षा विभाग ने विभिन्न स्थानों से मिलने वाली गोपनीय शिकायतें मिलने के बाद एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें सभी डीईओ से कहा है कि वे डीपीसी से समन्वय कर इसकी कॉपी प्राइवेट स्कूलों को भी उपलब्ध करवाएं। हालांकि इसकी कॉपी एजुकेशन पोर्टल पर भी लोड कर दी गई है। 

राज्य शिक्षा केंद्र की आयुक्त एवं सचिव रश्मि अरुण शमी ने बताया कि कुछ स्थानों से शिकायत मिली हैं कि निजी स्कूलों में अधिनियम की धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों के साथ कक्षा की बैठक व्यवस्था और उनकी शैक्षिक गतिविधियों में भेदभाव किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि वंचित समूह और कमजोर वर्ग के बच्चों के साथ भेदभाव की शिकायत प्राप्त होती है तो अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा और स्कूल की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। 

यह कार्रवाई आरटीई की धारा 18 के तहत होगी। वेबसाइट पर जारी आदेश के मुताबिक, प्राइवेट स्कूल को मान्यता प्रमाण-पत्र जारी करते समय जानकारी दें कि उनके स्कूल में गरीब बच्चों के साथ भेदभाव नहीं होगा। यदि भेदभाव होता है तो इसकी जानकारी तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना अधिकारी को दी जाए। जिला शिक्षा अधिकारी को भेदभाव की शिकायत मिलने के तीन दिन के भीतर प्रकरण में हस्तक्षेप कर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

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