सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध से DELHI खुश, काफी कम रहा प्रदूषण लेवल

Friday, October 20, 2017

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए पटाखों पर प्रतिबंध से दिल्ली ने राहत की सांस ली है। पिछले साल की तुलना में प्रदूषण का स्तर काफी कम रहा। लोग खुश हैं और पहली बार हुआ कि अस्थमा के मरीजों को रातों रात अस्पताल दाखिल नहीं कराना पड़ा। दिवाली पर आतिशबाजी से होने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए इस प्रतिबंध को लोगों ने स्वीकार भी कर लिया। पिछले कई सालों के मुकाबले इस बार दिवाली के दिन बहुत कम आतिशबाजी देखने को मिली। अब हर किसी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का असर हवा की गुणवत्ता पर कितना पड़ा है। 

दिल्ली ने ली राहत की सांस 
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार दिवाली पर हवा की गुणवत्ता बेहतर है। हालांकि बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स पर आनंद विहार का जो आंकड़ा दिख रहा है वह डराने वाला है। सुबह 8 बजे आनंद विहार में पीएम10 का स्तर 2402 था, जबकि पीएम 2.5 का स्तर 473 दर्ज किया गया। दिल्ली के द्वारिका इलाके में इसी समय पीएम 2.5 का स्तर 657.20 था। पंजाबी बाग में पीएम10 का स्तर सुबह 8.20 बजे 1,587 के स्तर पर था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शुक्रवार सुबह 8 बजे दिल्ली में हवा की औसत गुणवत्ता 355 रही, जो पिछले साल 438 थी।

नोएडा के सेक्टर 125 में सुबह 8.30 बजे पीएम10 का स्तर 784, जबकि पीएम2.5 भी 555 के स्तर पर था। नोएडा सेक्टर 62 में पीएम10 का स्तर 456 और पीएम 2.5 भी 284 के स्तर पर था। गाजियाबाद के वसुंधरा में भी लगभग इसी समय पीएम10 का स्तर 587 और 2.5 भी 358 के स्तर पर था। एनसीआर के फरीदाबाद में दिवाली की रात 10.30 बजे पीएम 2.5 का स्तर 1066 तक पहुंच गया था।

एयर क्वालिटी इंडेक्स को ऐसे समझें
0-50 अच्छी
51-100 संतोषजनक
101-200 मध्यम
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब
401 से ऊपर चिंताजनक स्थिति

पिछले साल ऐसे थे हालात
साल 2016 में दिवाली के दौरान प्रदूषण लेवल वर्ष 2015 की तुलना में दोगुना मापा गया था। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 2016 में पीएम पर्टिकुलेट मैटर 2.5 1238 पाया गया था जो कि 2015 के 435 के मुकाबले दोगुने से भी कहीं अधिक था। वर्ष 2016 में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली शुरुआती 11 शहरों में शामिल था। इसमें भारत के करीब तीन शहर शामिल थे। वहीं वर्ष 2017 में टॉप 10 प्रदूषित शहरों की बात करें तो इसमें भारत के रायपुर, पटना और ग्वालियर का नाम शामिल है। 2015 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली की एयर क्वालिटी को ‘बेहद खराब’ घोषित किया था।

इस साल दिवाली से पहले ही बिगड़ने लगे थे हालात
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स में दिवाली के दिन शाम 4 बजे तक दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब की स्थिति में पहुंच चुकी थी। शाम 4 बजे तक पिछले 24 घंटों के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का स्तर 319 पहुंच गया था, जो पिछले साल दिवाली यानी 30 अक्टूबर को 431 था। हालांकि इसमें सुधार तो दिखा, लेकिन फिर भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब की श्रेणी में ही रही।

दिवाली से पहले ऐसे थे हालात 
सोमवार 16 अक्टूबर की सुबह दिल्ली में आनंद विहार और आसपास के इलाकों में हवा में पीएम 2.5 का स्तर 118 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का स्‍तर 691 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था। जबकि इनका स्‍तर 60 और 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए। 

गाजियाबाद में सोमवार सुबह करीब 8 बजे हवा में पीएम 2.5 का स्तर 300 और पीएम 10 का स्‍तर 562 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। वहीं नाइट्रिक ऑक्‍साइड और ऑक्‍साइड ऑफ नाइड्रोजन के स्‍तर की बात की जाए तो यह 325 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था।

शरीर के लिए खतरनाक हैं ये महीन कण 
बता दें कि यह सभी हवा में तैरते हुए बेहद महीन कण होते हैं जो सांस के जरिए इंसान के अंदर जाते हैं और फैफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे लोग जो अस्‍थमा से ग्रसित होते हैं उनके लिए यह कण बड़ी समस्‍या खड़ी कर देते हैं। ऐसे लोगों को इस तरह के मौसम या हवा में बेहद सावधानी बरतनी जरूरी होती है। वहीं यह बच्‍चों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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