2000 साल पहले चमत्कारी कमल पुष्प श्रीगणेश प्रतिमा में परिवर्तित हो गया

Saturday, August 26, 2017

भोपाल। चिंतामन गणेश के बारे में जो लोग जानते हैं, उन्हे बेहरत मालूम हैं कि ये भारत के ऐसे 4 मंदिर हैं जहां श्रीगणेश स्वयं साक्षात प्रकट हुए। यहां स्थापित प्रतिमाएं स्वयंभू हैं। उन्हे किसी कारीगर ने नहीं बनाया। इन प्रतिमाओं को आज तक कभी हटाया या हिलाया तक नहीं जा सका है। जब कोई व्यक्ति प्रतिमा के सामने आंख से आंख मिलाकर खड़ा होता है तो सुध बुध खो बैठता है। देश में ऐसे कुल 4 श्रीगणेश मंदिर है। यहां हम आपको मध्यप्रदेश के सीहोर स्थित श्री सिद्धपुर चिंतामन गणेश मंदिर की कथा सुनाते हैं। 

यह कथा लगभग 2000 वर्ष पुरानी है। सम्राट विक्रमादित्य महाराज परमार वंश हर बुधवार रणथंमौर के किले से सवाई माधोपुर राजस्थान के किले में स्थित चिंतामन सिद्ध गणेश के दर्शन के लिये जाया करते थे। एक दिन राजा से गणेशजी ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि हे राजन तुम पार्वती नदी में शिव-पार्वती के संगम स्थल पर वर्तमान में गणेश मंदिर से लगभग 10-15 किलोमीटर पश्चिम में, जहां सीवन नदी (पुराना नाम शिवनाथ पार्वती नदी) में मिली है। कमल पुष्प के रूप में प्रकट होऊंगा। उस पुष्प को ग्रहण कर अपने साथ ले चलो।

स्वप्न में दिये निर्देशानुसार राजा ने कमल पुष्प ग्रहण कर रथ में लेकर चला, तभी आकाशवाणी हुई, हे राजन रात ही रात में जहां चाहो ले चलो। प्रातः काल होते ही मैं वहीं रुक जाऊंगा। राजा कुछ दूर ही चले थे कि अचानक रथ के पहिए जमीन में धंस गए। राजा ने रथ के पहिए भूमि से निकालने का प्रयास किया, किन्तु रथ क्षतिग्रस्त हो गया।

दूसरे रथ की व्यवस्था होते-होते सूर्योदय हो गया। पक्षीगण बोलने लगे, तो कमल पुष्प गणेशजी की मूर्ति के रूप में परिवर्तन हो गया। यह मूर्ति खड़ी हुई है तथा स्वयंभू प्रतिमा है। जैसे ही राजा ने प्रतिमा को उठवाने का प्रयास किया, वैसे ही प्रतिमा जमीन में धंसने लगी, बहुत प्रयत्न करने के बाद भी प्रतिमा अपने स्थान से हिली तक नहीं, बल्कि धंसती चली गई। तब राजा ने वहीं उनकी स्थापना कर दी। बाद में मंदिर का निर्माण करवाया।

देश भर में चार स्थानों पर विराजित हैं चिंतामन गणेश
बातया जाता है कि चिंतामन गणेश की स्वंयभू प्रतिमा देश भर में चार स्थानों पर विराजित है। प्रथम रणथम्भौर सवाई माधोपुर राजस्थान, दूसरा सिद्वपुर सीहोर, तीसरा अवन्तिका उज्जैन, चौथा सिद्वपुर गुजरात में विराजित है।

मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त बनाते हैं उल्टा स्वस्तिक
मनोकामनाएं पूरी हो, इसके लिए भक्त मंदिर के पीछे वाली दीवार पर उलटे स्वस्तिक बनाते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर इसे सीधा बनाते हैं। लेकिन, इससे पहले पंडित याचक को नारियल, जनेऊ, सुपारी और एक सिक्का देकर गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करते हैं। मंदिर श्रीयंत्र के कोणों पर निर्मित है। यहां पर सभी लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है।

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