कश्मीर छोड़ बंगाल पर क्यों फोकस्ड हो गई BJP, क्या है ‘इबार बांग्ला’ प्लान

Saturday, July 8, 2017

नई दिल्ली। जब से भाजपा का गठन हुआ है तब से लेकर केंद्र में मोदी सरकार बनने के एक साल बाद तक भाजपा के हर कार्यकर्ता के लिए कश्मीर बड़ा मुद्दा था। भाषणों में नेता और सोशल मीडिया पर भाजपा कार्यकर्ता कश्मीर में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का वर्णन किया करते थे परंतु पिछले कुछ समय से भाजपा का ऐजेंडा बदल गया है। अब वो कश्मीर नहीं पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ चीख रही है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि भाजपा ने कश्मीर छोड़, पश्चिम बंगाल पर फोकस कर लिया। क्या कश्मीर में अब हिंदुओं के हित सुरक्षित हैं या रणनीति कुछ और ही है। 

कोलकाता में बशीरहाट दंगे को लेकर भाजपा ने देशव्यापी अघोषित अभियान चला रखा है। पिछले दिनों बादुड़िया के रूद्रपुर गांव के एक शख्स ने फेसबुक पर धर्म विशेष को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया था जिसके बाद बादुड़िया और बशीरहाट में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। भाजपा ने इस मामले को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमले शुरू कर दिए हैं। कानून व्यवस्था, विकास के जिन सवालों को लेकर कभी ममता ने बंगाल में तीन दशक तक जमे लेफ्ट को उखाड़ फेंका था उन्हीं सवालों को लेकर बीजेपी ममता को बंगाल से बाहर करने की कोशिश कर रही है। आइए जानते हैं बंगाल को लेकर बीजेपी की स्ट्रेटजी क्या है?

जानें क्या है अमित शाह का ‘इबार बांग्ला’ प्लान
अमित शाह बंगाल के एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं. अमित शाह का यह एक्शन प्लान है- इबार बांग्ला. मतलब अबकी बार बंगाल की बारी. बीजेपी ममता का जोरदार विरोध करती है औऱ इससे ममता गुस्सा होती हैं. सत्ता गंवाने के बाद लेफ्ट पार्टियां घर में बैठ चुकी हैं और बीजेपी खुद को मुख्य विपक्ष के तौर पर पेश कर रही है.

बता दें कि 2014 के चुनाव में पूरे देश में मोदी की लहर चल रही थी तब भी बंगाल में लहर ममता की ही दिखी. बीजेपी 17 प्रतिशत वोट हासिल करके सिर्फ दार्जिलिंग और आसनसोल की सीटें निकाल पाई. बंगाल में बीजेपी तिनका तिनका जोड़कर घर बनाने की कोशिश कर रही है. इसका कुछ कुछ असर दिखने लगा है.

वोट प्रतिशत में कौन है किसपर भारी…?
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी 3 सीटें जीतने में कामयाब रही. हालांकि 2014 वाला वोट प्रतिशत 17 से गिरकर 10 प्रतिशत पर आ गया लेकिन वोटर की संख्या लगभग तिगुनी बढ़ी. 2011 में 19 लाख लोगों ने बीजेपी को वोट दिया था लेकिन पिछले साल 56 लाख वोट मिले.

बंगाल में बीजेपी को लॉन्चिंग पैड तो मिल चुका है लेकिन इतना काफी नहीं है. ममता बनर्जी की बहुत बड़ी ताकत 28 प्रतिशत मुस्लिम वोटर है. इस 28 प्रतिशत में बीजेपी का कुछ नहीं है. ममता मुस्लिमों में अति सुरक्षा की भावना भर रही हैं. वो इस बात की भी परवाह नहीं कर रही हैं कि उन्हें हिंदु विरोधी के तौर पर पेश किया जा रहा है.

बीजेपी ममता को दिखा रही है हिंदुओं का डर!
बीजेपी हिंदूओं को ममता का डर दिखा रहा है. 24 परगना की हिंसा के बाद बीजेपी के बंगाल प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने फेसबुक पर लिखा, ‘पूरे पश्चिम बंगाल में अराजकता फैली हुई है. ममता राज में हिंदुओं के घर जलाए जा रहे हैं. पुलिस की उपस्थिति में हिन्दुओं के घर और दुकान जलाए जा रहें हैं? खुलेआम पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहें हैं पर इन दहशतगर्दों और देशद्रोहियों को लेकर ममता सरकार मौन है?’

कभी बीजेपी तो कभी ममता आगे
बीजेपी ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर भी सर्जिकल स्ट्राइक करने में सफल रही है. त्रिपुरा में ममता की पार्टी के 6 विधायक बने थे. राष्ट्रपति चुनाव के बहाने त्रिपुरा की तृणमूल कांग्रेस ने ममता के खिलाफ बगावत करते हुए एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन का एलान कर दिया. ममता ने सबको निकाल कर अपना गुस्सा ठंडा कर लिया लेकिन सुना ये जा रहा है कि त्रिपुरा के ये 6 विधायक आजकल में बीजेपी में आ जाएंगे. आरोप तो यहां तक लगे हैं कि बीजेपी के ही शह पर दार्जिलिंग में बिमल गुरुंग ममता के खिलाफ बगावत कर बैठे. बिमल गुरुंग के असर वाले दार्जिलिंग में बीजेपी 2009 और 2014 में लोकसभा सीट जीतने में कामयाब रही. गौरतलब है कि अकेले ममता बीजेपी और गुरुंग के दांत खट्टे कर रही हैं. मिरिक नगरपालिका पर गुरुंग की पार्टी कभी नहीं हारी लेकिन ममता ने पहली बार पहाड़ में बिमल गुरुंग को राजनीतिक शिकस्त दी है.

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