अनिल माधव: भारत का गंभीर पर्यावरण कार्यकर्ता चला गया

Thursday, May 18, 2017

शैलेन्द्र गुप्ता/भोपाल। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का आज निधन हो गया, दवे के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए शोक जताया, उन्होंने दवे को कर्मठ और पर्यावरण के लिए सतत काम करने वाला नेता बताया है। अनिल माधव दवे को पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा 5 जुलाई 2016 में मिला था, जब पीएम मोदी ने अपने कैबिनेट में बदलाव करते हुए दवे को मंत्रालय संभालने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

अनिल माधव का जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बादनगर में, 6 जुलाई 1956 को हुआ था। उनकी मां का नाम पुष्पा देवी और पिता का नाम माधव दवे था। दवे की उच्च शिक्षा गुजराती संस्थान में हुई थी और उन्होंने अपनी मास्टर की डिग्री इंदौर के संस्थान से हासिल की थी। जिसके बाद उन्होंने इंदौर से ग्रामीण विकास और प्रबंधन की पढ़ाई की। दवे ने अपना राजनीतिक कैरियर इसी दौरान शुरु कर दिया था और जेपी आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। जिसके बाद वह अपने कॉलेज में अध्यक्ष के पद पर चुने गए। दवे तमाम शैक्षणिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे और उन्होंने नेशनल कैडेट कोर में एयर विंग में भी अपनी सेवाएं दी थी।

दवे ने अपने पूरे जीवन को पर्यावरण के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया था। राजनीति में आने के बाद अनिल दवे ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना शुरु की और नर्मदा बचाओ अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। दवे ने खुद नर्मदा समग्र नाम की एक संस्था बनाई थी, जो नर्मदा को बचाने के लिए काम करती थी, इस संस्था के तहत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था, जिसके जरिए लोगों को इसे बचाने के लिए जागरूक किया जाता था।

दवे ने एनसीसी के कैडेट के तौर पर एयर विंग में अपनी सेवाएं दी थी, लेकिन बहुत ही कम लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर दिया था और नर्मदा बचाओ अभियान के लिए उन्होंने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनी सेसना के विमान 173 को नर्मदा के किनारे तकरीबन 18 घंटे तक उड़ाया था। उन्होंने 19 दिन तक इस विमान को कुल 1312 किलोमीटर तक उड़ाया था और इसकी पूरी परिक्रमा की थी। नर्मदा नदी पर रिवर फेस्टिवल शुरु कराने में भी दवे ने खास भूमिका निभाई थी, यह पूरे एशिया में अपने आप में सबसे अनोखा कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण में बदलाव से संबंधित मुद्दों के अलावा दुनियाभर की नदियों के संरक्षण पर चर्चा की जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 15 अगस्त 2014 को लाल किले पर अपने भाषण के दौरान जैविक शौचालय की बात की थी तो दवे ने मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में इस अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने हर स्कूल में जैविक शौचालय की शुरुआत की थी और जिसमें हौशंगाबाद के 1880 स्कूलों में 98000 बच्चों के लिए लड़कों और लड़कियों के लिए अलग जैविक शौचालय की व्यवस्था की गई थी।

जिसके बाद 2009 में पहली बार मध्य प्रदेश से भाजपा ने इन्हें राज्यसभा भेजा। दवे इस कई कमेटियों के सदस्य रहे, जिसमें जल संसाधन कमेटी, इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग कमेटी अहम हैं। मार्च 2010 में यह ग्लोबल वॉर्मिंग एंड क्लाइमेट चेंज की संसदीय फोरम में भी इन्होंने अपनी अहम भूमिका निभाई। 2010 में एक बार फिर से फिर से दवे को राज्यसभा में फेजा गया और मौजूदा समय तक वह राज्यसभा के सदस्य थे।5 जुलाई 2016 को पर्यावरण मंत्रालय की कमान संभालने के बाद वह लगातार पर्यावरण को बेहतर करने के लिए कदम उठाते रहे। उन्हें प्रकाश जावड़ेकर की जगह इस मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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