हिंसक बयान: RSS पीछे हटा, प्रचारक अब भी डटा

Thursday, March 2, 2017

भोपाल। उज्जैन में संघ प्रचारक डॉ. कुंदन चंद्रावत के हिंसा भड़काने वाले बयान के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बैकफुट पर आ गया है। आरएसएस ने खुद को संघ प्रचारक के बयान से अलग करते हुए कहा है कि 'संघ हिंसा की संस्कृति का समर्थक नहीं है।' बता दें कि संघ प्रचारक चंद्रावत ने ना केवल केरल के सीएम की हत्या पर इनाम का ऐलान किया था केरल में संघ विरोधियों को गोधरा की धमकी भी दी थी। 

आरएसएस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि संघ हिंसा की संस्कृति का समर्थक नहीं है। संघ इस बयान से खुद को अलग करता है। मार्क्सवादियों की संस्कृति हिंसा की है। इस तरह के बयान देने वाले से संघ खुद को दूर करता है और बयान गलत है।

किसी व्यक्ति के विचार संघ का अधिकृत बयान नहीं 
उधर आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे नंद कुमार ने तो चंद्रावत को संघ प्रचारक ही नहीं माना। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में कई प्रकार के संगठनों और संस्थानों के कार्यकर्ता वक्ता के तौर पर आते हैं। इसीलिए उनकी ओर से दिया गया कोई भी बयान संघ का अधिकृत वक्तव्य नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि संघ अपनी स्थापना के समय से ही व्यक्ति निर्माण और समाज सेवा के कार्य में संलग्न है और हम कभी भी हिंसा में विश्वास नहीं रखा।

मुझे अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की उज्जैन महानगर इकाई के प्रचार प्रमुख डॉ. कुंदन चंद्रावत ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का सिर काटकर लाने वाले को एक करोड़ रुपये का इनाम देने का ऐलान किया था। चंद्रावत ने कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि केरल की वामपंथी सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। संघ की शाखा लगाने वालों की हत्या की जा रही है। केरल में संघ कार्यकर्ताओं पर हो रहे हिंसक हमलों के विरोध में बुधवार को जनाधिकार समिति द्वारा आयोजित सभा में चंद्रावत ने कहा था कि हिंदुओं के खून में शिवाजी का जज्बा नहीं रहा। मैं घोषणा करता हूं कि जो भी व्यक्ति केरल के मुख्यमंत्री का सिर काटकर लाएगा, उसे मैं अपनी संपत्ति से एक करोड़ रुपये का इनाम दूंगा।

चंद्रावत ने कहा कि मेरे पास इतनी संपत्ति है कि मैं उसे बेचकर इनाम दे सकता हूं. मेरा मकान ही एक करोड़ रुपये का है और जो यह काम करेगा, उसे मकान बेचकर इनाम दूंगा। मैं इनाम की घोषणा इसलिए कर रहा हूं, क्योंकि ऐसे गद्दारों को देश में रहने का अधिकार नहीं है।

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