पुलिस अधिकारी नक्सलियों से ज्यादा संघ के कार्यकर्ताओं से डरते हैं: ज्ञापन

Sunday, October 16, 2016

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बालाघाट/भोपाल। संघ प्रचारक सुरेश यादव मारपीट कांड में फरार चल रहे पुलिस कर्मचारियों के परिवारजनों ने पुलिस के आला अधिकारियों को दिए एक ज्ञापन में लिखा है कि 'पुलिस अधिकारी नक्सलियों से ज्यादा संघ के कार्यकर्ताओं से डरते हैं'। ज्ञापन में यह भी लिखा गया है कि संघ और उसके सहयोगी संगठनों के करीब 1000 कार्यकर्ताओं ने थाना जलाने की कोशिश की और जिन पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों ने थाने को बचाया उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। 

बता दें ​कि 26 सितंबर को पुलिस ने संघ प्रचारक सुरेश यादव को व्हाट्स अप पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर गिरफ्तार किया था। ज्ञापन में बताया गया है कि जब पुलिवालों ने यादव को गिरफ्तार किया था तब संघ कार्यकर्ताओं ने धमकी देते हुए कहा, “तुम्हें पता नहीं, तुम किसे हाथ लगाने का दुस्साहस कर रहे हो। हम मुख्यमंत्री को पद से हटा सकते हैं, यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी। हम सरकार बना सकते हैं और गिरा भी सकते हैं। तुम्हारी कोई औकात नहीं। अगर हम तुम्हारी वर्दी उतरवाने में असफल रहे तो संघ छोड़ देंगे।”

पीड़ित पुलिसवालों के परिजनों ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक और आरक्षी महानिरीक्षक को तीन पन्नों का ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। इन लोगों ने पुलिस के आलाधिकारियों से पूछा है कि उनके परिजनों को निष्पक्ष और भेदभाव किए बिना ड्यूटी करने पर परेशान क्यों किया जा रहा है? 

डीजीपी को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी नक्सलियों से ज्यादा संघ के कार्यकर्ताओं से डरते हैं। ज्ञापन में सुरेश यादव समेत संघ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की भी मांग की गई है। यादव दो दिन पहले ही जबलपुर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए हैं। बालाघाट रेंज के आईजी जे जनार्दन ने बताया कि आरोपी पुलिसवालों की पत्नियों समेत करीब 20 महिलाओं ने मुलाकात की है और शिकायत की है कि उनके पति को झूठे मुकदमें फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर रही एसआईटी को उन्होंने ज्ञापन भेज दिया है।

इस विवादास्पद मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक एसआईटी का गठन किया है। मामले में एडिशनल एसपी राजेश शर्मा और स्थानीय थाना इंचार्ज जिया उल हक को सस्पेंड किया जा चुका है जबकि बालाघाट के आईजी डी सी सागर और एसपी असीत यादव का ट्रांसफर किया जा चुका है। जे जनार्दन ने 7 अक्टूबर को आईजी का पदभार संभाला है। आईजी और एसपी को छोड़कर सभी पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपी फरार चल रहे हैं। 

पुलिस को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यादव और उसके समर्थकों ने पुलिवालों को न सिर्फ धमकी दी, अपमानित किया बल्कि उन्हें काम करने से रोका भी। ज्ञापन में कहा गया है कि आरएसएस, वीएचपी, बजरंग दल, गौरक्षा समिति और बाजेपी के करीब 1000 कार्यकर्ताओं ने पुलिस थानों को जलाने, दंगा भड़काने की धमकी दी थी। ऐसे हालात में पुलिसवालों ने थाने को बचाया लेकिन बदले में उन्हें ही फंसा दिया गया। 
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