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दुनिया में सबसे तंदुरुस्त हैं भारत के बेरोजगार

Wednesday, October 5, 2016

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बेरोजगारी के दुष्प्रभावों के बारे में सभी जानते हैं और इस पर कई शोध भी हो चुके हैं, लेकिन नया विश्लेषण बताता है कि दुनिया के सभी विकसित व धनवान देशों के बेरोजगार युवाओं की सेहत 50 वर्ष से अधिक आयु वालों के समान हो जाती है। इन धनी देशों को भारत जैसे कम आय वर्ग वाले देश ने नसीहत दी है जहां विषम हालात के बावजूद परिवार के लोग बेरोजगार युवा की सेहत का सहारा बन जाते हैं।

इस विश्लेषण में भारत समेत दुनिया के 47 धनवान देशों को शामिल किया गया। अध्ययन के लिए दुनिया में युवाओं को रोजगार के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित करने वाली प्रख्यात संस्था ‘मैककिंसे सोशल इनीशिएटिव जेनरेशन’ के आंकड़ों का सहारा भी लिया गया। दुनिया भर के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि धनवान और विकसित देशों में 15 से 29 वर्ष के बेरोजगार वयस्क युवाओं की शारीरिक सेहत 50 से ऊपर की आयु वाले उन लोगों जैसी है जो अभी भी रोजगार से जुड़े हुए हैं। यानी अमेरिका और स्पेन जैसे विकसित देशों में 74 से 76 प्रतिशत युवा बेरोजगारों का स्वास्थ्य वहां पर रोजगार से जुड़े खुशहाल अधेड़ उम्र वाले लोगों के समान पाया गया। 

दूसरी तरफ भारत जैसे गरीब और उच्च-मध्यम अर्थव्यवस्था वाले देश में हालात एकदम अलग पाए गए। जेनरेशन प्रोग्राम आंकड़ों के मुताबिक यहां मात्र 1 प्रतिशत युवा अपने परिवार से अलग रहते हैं और 45 फीसदी युवाओं के परिवार में छह या अधिक लोग साथ रहते हैं। ये परिजन युवा बेरोजगार का बुरे वक्त में सहारा बनते हैं और न सिर्फ उसे साहस बंधाते हैं बल्कि उसकी आर्थिक जरूरतें भी मिल बैठकर पूरी कर लेते हैं। जबकि अमेरिका में 26 फीसदी युवा परिवारों से पूरी तरह कटे हुए हैं। जो युवा परिवार के साथ हैं उन्हें भी परिजनों का सहारा नहीं है क्योंकि वे एकाकी परिवार में रह रहे हैं।

भारत जैसे देशों की पारिवारिक मजबूती का अध्ययन जरूरी है
अधिकांशतया बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को लेकर दुनिया ने विकासशील देशों पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया हुआ है, लेकिन अब इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि विकसित देशों में बेरोजगार युवाओं का स्वास्थ्य सबसे बुरी हालत में है। इस विश्लेषण में सलाह दी गई कि भारत जैसे देशों में सामाजिक व्यवस्था का अध्ययन करके विकसित देशों को पारिवारिक सहारे की दिशा में पहल करनी चाहिए।
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