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संविदा कर्मचारियों की बहाली के लिए सकाम दिया अल्टीमेटम | कर्मचारी समाचार

Tuesday, September 13, 2016

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भोपाल।  मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में पन्द्रह वर्षो से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अधिकारी कार्य कर रहे थे। विगत फरवरी माह में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया था। जिसमें सरकार ने उनकी मांगे पूरी करने का आश्वासन देकर हड़ताल समाप्त करवाई थी। 

आंदोलन समाप्ती के पश्चात् स्वास्थ्य विभाग में बैठे आला अधिकारियों ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगे पूरी करने की बजाए संविदा कर्मचारियों से द्विवेषपूर्ण भावना रखते हुये संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटाने के लिए पन्द्रह साल बाद अप्रैजल करवाया। जिसमें दो से तीन हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी। विभाग में सत्रह कैडर पद समाप्त कर दिये गये । जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो गये हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संविदा कर्मचारियों को हटाने के लिए अप्रैजल करवाया गया जिसमें अनेक विसंगतियां थीं। अप्रैजल में लिखित तथा मौखिक परीक्षाएं आयोजित करवाई गई जिसमें निर्देश थे कि कर्मचारियों को परीक्षा के पश्चात् तत्काल उनके नम्बर बतलाये जाएं लेकिन आज दिनांक तक कर्मचारियों को उनके नम्बर नहीं बतलाये गये। 

कर्मचारियों को नम्बर जानने के लिए आरटीआई का साहारा लेना पढ़ रहा है। जिन जिलों के अधिकारी अप्रैजल में बैठे थे उन जिलों के कर्मचारियों को बाहर नहीं किया गया। अप्रैजल के नाम पर करोड़ों रूपये भ्रष्टाचार किया गया। अप्रेजल में पास करवाने के नाम पर करोड़ों रूपये की वसुली संविदा कर्मचारियों से की गई । कुछ कर्मचारी ऐसे थे जिनको पहले फेल किया गया । पैसे लेने के बाद उनको पास कर दिया गया। जो कि केवल संविदा कर्मचारियों का ही अप्रैजल करवाया गया वहीं नियमित कर्मचारियों को इस अप्रैजल से बाहर रखा गया। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए थे। चाहे वो नियमित हो या संविदा कर्मचारी। राष्टीय स्वास्थ्य मिशन में ही प्रतिनियुक्ति पर नियमित अधिकारी अनेक वर्षो से जमे हुये हैं जबकि नियमानुसार प्रतिनियुक्ति तीन वर्ष से ज्यादा नहीं हो सकती है । स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे नियम विरूद्व प्रतिनियुक्ति पर जमें अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है। 

संविदा कर्मचारियों का अनेक विसंगतियों से भरा अप्रैजल करवाकर अनेक संविदा कर्मचारियों की संविदा समाप्त कर दीं । कुछ संविदा कर्मचारियों को यह कहकर हटा दिया कि 2016-17 की पी.आईपी. में आपके पद समाप्त कर दिये गये हैं। जबकि हकीकत यही है कि पी.आई.पी. में प्रस्ताव म.प्र. स्तर से ही नहीं भेजे गये थे।

एच.आर. लागत कम करने के नाम पर संविदा कर्मचारियों की छटनी की गई जबकि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारी वर्षो से विभाग में जमें हैं उनको नहीं हटाया गया। अभी विगत दिनों दवा वितरण सहायकों को सेवा से हटा दिया गया । सरकार द्वारा योजना आर्थिक सांख्यिकी के प्रगणकों, कौशल विकास केन्द्र में कार्य करने वाले तकनीकी कर्मचारियों , बीआरजीएफ के डाटा एन्ट्री आपरेटर, उपयंत्रियों को भी अभी कुछ दिन पहले हटा दिया गया । 

म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ तथा संविदा कर्मचारियों की बाहली की मांग को लेकर 4 अक्टूबर से आंदोलन का अल्टीमेटम मुख्यमंत्री,, मुख्यसचिव, स्वास्थ्य मंत्री,, प्रमुख सचिव गौरी सिंह , राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन डायरेक्टर किरण गोपाल राव को दे दिया है, कि यदि 3 अक्टूबर तक संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों सहित् कौशल विकास केन्द्र, योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग के प्रगणकों, बी.आरजी.एफ. के उपयंत्री,, डाटा एन्ट्री आपरेटरों की बहाली नहीं गई तो 4 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी धरना राजधानी के नीलम पार्क में देकर आंदोलन की शुरूआत की जायेगी ।  
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