भोपाल, 26 सितंबर 2026: छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड तो यदि होगा जिसमें भविष्य अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले में बहुत सारे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। छिंदवाड़ा औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा को भी कर्तव्य में लापरवाही के कारण सस्पेंड कर दिया गया था। जांच का दायरा बहुत बढ़ गया, और फिर श्री शर्मा के खिलाफ कोई गंभीर आरोप नहीं था इसलिए डिपार्टमेंट ने एक साल के निलंबन के बाद उनको फिर से ड्यूटी पर लगा लिया है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि जब जांच पूरी नहीं हुई है तो, निलंबित अधिकारी को फिर से नियमित सेवा में क्यों लिया गया?
श्री पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू 23 सितंबर 2026 का प्रशासनिक आदेश है।रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन छिंदवाड़ा औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा को अक्टूबर 2025 में निलंबित किया गया था। बाद में उनके विरुद्ध औपचारिक आरोप-पत्र जारी हुआ और उनके जवाब को “प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं” पाए जाने के बाद फरवरी 2026 में विभागीय जांच संस्थित की गई। इसके बावजूद 23 सितंबर 2026 के आदेश से उन्हें निलंबन से बहाल कर जिला गुना में पदस्थ कर दिया गया, जबकि विभागीय जांच के निष्कर्ष अभी लंबित थे।
श्री पटवारी ने सरकार से सीधा सवाल किया
- जब जवाब संतोषजनक नहीं था, जब विभागीय जांच जारी थी, तो बहाली की इतनी जल्दी क्यों थी?
- क्या 24 मासूम बच्चों की मौत के बाद भी सरकारी जवाबदेही इतनी कमजोर है कि जांच पूरी होने से पहले ही अधिकारी को दूसरी जगह पदस्थ किया जा सकता है?
- उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि इस बहाली का आधार क्या था और क्या इस फैसले में पीड़ित परिवारों के न्याय के हितों को ध्यान में रखा गया?
निलंबन सिर्फ दिखावा था या कार्रवाई?
श्री पटवारी ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार त्रासदी के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। छिंदवाड़ा और जबलपुर के औषधि निरीक्षकों को निलंबित किया गया, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उप संचालक को निलंबित किया गया और तत्कालीन ड्रग कंट्रोलर को पद से हटाकर स्थानांतरित किया गया। साथ ही SIT गठित कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने शुरुआती स्तर पर इतनी गंभीर कार्रवाई की थी, तो आज सवाल यह है कि उस कार्रवाई का अंतिम परिणाम क्या हुआ
“सरकार बताए कि निलंबन के बाद क्या हुआ? विभागीय जांच कहां पहुंची? किस अधिकारी की जवाबदेही तय हुई? और किसके खिलाफ अंतिम कार्रवाई हुई?”
श्री पटवारी ने कहा कि रिपोर्ट में प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार मऊगंज से शुरू हुई जांच में नेटवर्क के 12 राज्यों तक फैले होने का उल्लेख है। जांच में 350 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए 20 लाख से अधिक कोडीन युक्त कफ सिरप की बोतलों को अवैध बाजार में खपाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में एक आरोपी की ₹9.5 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क किए जाने का भी उल्लेख है।
श्री पटवारी ने कहा कि यदि प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर फर्जी फर्मों और फर्जी ड्रग लाइसेंस के जरिए कफ सिरप का नेटवर्क चल रहा था, तो सरकार का औषधि नियंत्रण तंत्र इतने लंबे समय तक क्या कर रहा था?
रिपोर्ट में सागर, सतना, महाकौशल, विंध्य, इंदौर और उज्जैन सहित कई क्षेत्रों में कफ सिरप की बरामदगी और अवैध बिक्री का उल्लेख किया गया है। सागर में 72 हजार बोतलों की बरामदगी का भी उल्लेख है।
श्री पटवारी ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 55 जिलों में स्वीकृत औषधि निरीक्षक पदों में से आधे से अधिक पद रिक्त हैं और कई अधिकारियों को एक से अधिक जिलों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। रिपोर्ट में भोपाल की केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में आधुनिक परीक्षण उपकरणों और योग्य विश्लेषकों की कमी का भी उल्लेख है।

