भोपाल, 8 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पीएम श्री कॉलेज के एक प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है। 9 महीने पहले एक ऑडियो वायरल हुआ था। विभागीय जांच में यह ऑडियो सही पाया गया है। ऑडियो में कॉलेज प्रिंसिपल, एक निर्धन छात्र को रात में मिलने के लिए बुलाया था। हम इस समाचार के साथ ऑडियो और प्रिंसिपल का निलंबन आदेश भी संलग्न कर रहे हैं।
यह मामला सतना जिले के पीएम श्री कॉलेज का है। तत समय प्राचार्य पद का प्रभार, सीनियर प्रोफेसर डॉ. एससी राय के पास था। एक ऑडियो वायरल हुआ जिसमें एक व्यक्ति कॉलेज की एक छात्रा को कॉलेज के बाहर मिलने के लिए बुला रहा है। फिर वह यह भी कह रहा है कि 3-4 रात रुकने के लिए आओ। इसके बदले में वह निर्धन छात्र को सरकार की योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दे रहा है। ऑडियो के वायरल होने के बाद सतना में प्रदर्शन किया गया और दावा किया गया कि यह आवाज सीनियर प्रोफेसर डॉ. एससी राय की है। विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन के आधार पर विभागीय जांच शुरू की गई। अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा रीवा संभाग द्वारा मामले की जांच की गई जिसमें डॉ० एस. सी. राय, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना मप्र द्वारा महाविद्यालय की छात्रा के साथ अनुचित वार्तालाप किया जाना क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, रीवा संभाग, रीवा द्वारा जांच में प्रथम दृष्ट्या प्रमाणित पाया गया है।
इस जांच रिपोर्ट के आधार पर, सीनियर प्रोफेसर डॉ एस.सी. राय को पद के दुरूपयोग, अर्मयादित आचरण, स्वेच्छाचारिता एवं लापरवाही के कृत्यों के लिये राज्य शासन एतद् द्वारा डॉ० एस.सी. राय, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना को मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित करता है। निलंबन अवधि में डॉ० राय का मुख्यालय कार्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, रीवा संभाग, रीवा नियत रहेगा। निलंबन अवधि में डॉ राय को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
संचालनालय के बाबू ने 7 महीने तक सस्पेंशन ऑर्डर लटकाए रखा
बाबू कितना पावरफुल होता है? एक बार फिर साबित हुआ। अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा रीवा संभाग द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, मंत्रालय से प्रभारी प्राचार्य को सस्पेंड करने की मंजूरी दे दी गई थी लेकिन, सहायक ग्रेड-3 हर्ष रावत ने निलंबन आदेश जारी नहीं किया। उल्टा एक नेगेटिव टिप्पणी दर्ज करके फाइल को पेंडिंग कर दिया। पूरे 7 महीने तक फाइल पेंडिंग बनी रही। जब इस बात का खुलासा हुआ तो बाबू को भी सस्पेंड कर दिया गया।

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