शिक्षक को कलेक्ट्रेट में बंधक बनाकर पीटा, जिला परियोजना समन्वयक के खिलाफ FIR दर्ज

Updesh Awasthee
अनूपपुर, 19 अगस्त 2026
: संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक ने जिला परियोजना समन्वयक यानी DPC संजय कुमार मिश्रा पर कमरे में रोककर मारपीट करने, दस्तावेज और मोबाइल लेने, शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। शिक्षक की शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने DPC के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला 12 अगस्त का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक भवन निर्माण की शेष राशि के भुगतान को लेकर शिकायत करने वाले शिक्षकों की कलेक्ट्रेट के कक्ष क्रमांक 80 में बैठक बुलाई गई थी। शिकायतकर्ता शिक्षक इन्द्रसिंह राजपूत का आरोप है कि बैठक खत्म होने के बाद जब वे कमरे से बाहर निकल रहे थे, तभी उन्हें रोक लिया गया और दरवाजा बंद कर दिया गया। इसके बाद उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। शिक्षक ने पीठ पर घूंसा मारने और जूते से लात मारने का भी आरोप लगाया है।

शिकायत में शिक्षक ने यह भी कहा है कि भवन निर्माण से जुड़े पासबुक, लेजर, बिल-वाउचर और अन्य दस्तावेज उनसे ले लिए गए। उनका मोबाइल भी लिए जाने और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत का निराकरण करवाने का दबाव बनाने का आरोप है।

शिक्षक के मुताबिक, उनसे सादे कागज पर शिकायत वापस लेने संबंधी आवेदन भी लिखवाया गया। उन्होंने करीब 45 मिनट तक कमरे में रोके जाने और बाद में घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के बाद डर के कारण उन्होंने तत्काल पुलिस से संपर्क नहीं किया। इसके बाद 18 अगस्त को कोतवाली अनूपपुर में शिकायत दर्ज कराई गई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर DPC संजय कुमार मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 127(2), 296(b), 115(2) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच सहायक उप निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को सौंपी गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले में शिकायत में लगाए गए आरोपों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

BNS की धारा 127(2), 296(b), 115(2) और 351(2) में कितनी सजा का प्रावधान

1. धारा 115(2): स्वेच्छया उपहति (Voluntarily Causing Hurt) 
यदि कोई व्यक्ति धारा 122(1) (प्रकोपन के बिना) के मामलों को छोड़कर स्वेच्छया किसी को चोट या उपहति पहुँचाता है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी माना जाता है। इसके लिए एक वर्ष तक का कारावास, या दस हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
2. धारा 127(2): सदोष परिरोध (Wrongful Confinement) 
यह धारा किसी व्यक्ति को गलत तरीके से बंधक बनाने या उसके स्वतंत्र संचलन को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने (सदोष परिरोध) के अपराध के लिए दंड निर्धारित करती है। इसके तहत अपराधी को एक वर्ष तक का कारावास, या पाँच हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह अपराध शमनीय (Compoundable) है, जिसे पीड़ित व्यक्ति की सहमति से सुलझाया जा सकता है। मतलब राजीनामा हो सकता है।
3. धारा 296(b): सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द
यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान या उसके समीप कोई अश्लील गाना (Obscene Song), पवाड़ा या शब्द गाता है, सुनाता है या उच्चारित करता है, जिससे दूसरों को क्षोभ (annoyance) होता है, तो वह इस धारा के तहत आता है। इसके लिए तीन महीने तक का कारावास, या एक हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। 
4. धारा 351(2): Criminal Intimidation के लिए दंड
जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को डराने-धमकाने या भयभीत करने के उद्देश्य से आपराधिक अभित्रास का अपराध करता है, तो उसे इस उपधारा के तहत सजा दी जाती है। साधारण आपराधिक अभित्रास के लिए दो वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है। यदि धमकी गंभीर प्रकृति की है (जैसे मृत्यु या घोर उपहति), तो दंड अधिक हो सकता है। रिपोर्ट: वेद शर्मा





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