Bhopal Samachar: आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, एकदिवसीय क्रांति आंदोलन

Updesh Awasthee
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारी एवं चतुर्थ श्रेणी के अस्थाई कर्मचारियों का प्रदर्शन शुरू हो गया है। कई जिलों से आए कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसको "क्रांति आंदोलन" नाम दिया गया है। इसका आयोजन कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किया जा रहा है। दोपहर 1:00 बजे प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 500 है।

आउटसोर्स कर्मचारी के मुख्य मुद्दे और मांगें

  • सभी अस्थायी, आउटसोर्स, अंशकालीन और संविदा कर्मचारियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर नियमित किया जाए।
  • समान कार्य समान वेतन नीति को तत्काल लागू किया जाए या कम से कम ₹21,000 मासिक वेतन निर्धारित किया जाए।
  • ठेका प्रथा, कंपनी राज और अस्थायी रोजगार व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
  • बैंक मित्रों को सीधे बैंक से जोड़ा जाए, कंपनियों की भूमिका खत्म की जाए और नियमित वेतन दिया जाए।
  • राजस्व सर्वेयरों को मासिक वेतन तय कर नियमित रोजगार का दर्जा दिया जाए।
  • दो साल बाद आंदोलन की अनुमति
मोर्चा के संयोजक मंडल के अनुसार, यह प्रदर्शन पिछले दो वर्षों से लंबित था। लगातार अनुमति के लिए आवेदन किए जा रहे थे, लेकिन अब जाकर भोपाल पुलिस ने 12 अक्टूबर के लिए अनुमति दी है। इससे पहले इसी तरह का बड़ा प्रदर्शन वर्ष 2023 में हुआ था।

क्रांति आंदोलन के नेताओं के नाम

  • रजत शर्मा, अध्यक्ष, बैंक मित्र संगठन।
  • वीरेंद्र गोस्वामी, अध्यक्ष, राजस्व सर्वेयर संघ।
  • राजभान रावत, अध्यक्ष, पंचायत चौकीदार संघ।
  • उमाशंकर पाठक, अध्यक्ष, अंशकालीन कर्मचारी संघ।
  • मनोज उईके, डॉ. अमित सिंह (कार्यवाहक अध्यक्ष) और शिवेंद्र पांडे। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी उम्मीद

वासुदेव शर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 19 अगस्त 2025 को सिविल अपील क्रमांक 8558/2018 में स्पष्ट कहा है कि लंबे समय से कार्यरत अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स कर्मियों से कम वेतन पर समान कार्य लेना 'श्रमिक शोषण' है। न्यायालय ने यह भी माना कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। मोर्चा का कहना है कि यह फैसला प्रदेश के लाखों कर्मियों के लिए “न्याय की नई उम्मीद” लेकर आया है।

20 साल से बंद हैं नियमित भर्तियां

मोर्चे का आरोप है कि पिछले दो दशकों से प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के नियमित पदों पर भर्ती लगभग बंद है। विभागीय कार्य इन्हीं अस्थायी और आउटसोर्स कर्मियों से कराया जा रहा है, जिन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिलता है, न भविष्य की सुरक्षा। मोर्चा ने कहा यह स्थिति संविधान और श्रम कानूनों की खुली अवहेलना है। अब बदलाव की घड़ी आ गई है।

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