NASA की स्टडी से समझिए भारत में दाह संस्कार और पुनर्जन्म की थ्योरी - Space Science

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National Aeronautics and Space Administration (NASA) ने अंतरिक्ष के हजारों चित्रों की समीक्षा करके तारों का एक ऐसा चित्र जारी किया है जिसमें तारों का जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म (life, death, and rebirth) प्रदर्शित होता है। खगोलविदों (Astronomers) का सितारों के जीवन चक्र (Stellar Lifecycle) के बारे में अध्ययन और विवरण भारत के दाह संस्कार और पुनर्जन्म की थ्योरी को कनेक्ट करता है। 

भारत में दाह संस्कार को इतना अनिवार्य क्यों बताया गया है

भारत में कई विद्वान यह प्रश्न करते हैं कि जब भारत की प्राचीन परंपराओं के अनुसार किसी शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। अग्नि के प्रभाव के कारण वह शरीर, राख बन जाता है तो फिर उसका पुनर्जन्म कैसे हो सकता है। खगोलविदों (Astronomers) का सितारों के जीवन चक्र (Stellar Lifecycle) के बारे में अध्ययन इस बात को प्रमाणित करता है कि, दाह संस्कार ही एक प्रक्रिया है जो पुनर्जन्म का कारण होती है। यदि दाह संस्कार नहीं होगा तो पुनर्जन्म भी नहीं होगा। इसलिए भारतीय परंपराओं में पूरे विधि विधान के साथ दाह संस्कार करने और शरीर को पांचो तत्वों में वापस मिला देने को अनिवार्य बताया गया है। भारतीय संस्कृति में दाह संस्कार और पुनर्जन्म के विश्वास को समझने से पहले अंतरिक्ष में तारों के जीवन चक्र को समझना जरूरी है। 

तारों का जीवन चक्र - Stellar Life Cycle

हम सभी जानते हैं कि अंतरिक्ष में तारों का जन्म (Stellar Birth) नेबुला (Nebula) नामक विशाल गैस और धूल के बादलों से होता है। इन बादलों के अंदर हाइड्रोजन (Hydrogen) और हीलियम (Helium) गैस होती है। फिर तारे अपना जीवन (Stellar Life) पूरा करते हैं। Stellar Life पर अपन विस्तार से बात नहीं करेंगे क्योंकि यह बिल्कुल अलग विषय है। तारों की मृत्यु (Stellar Death) भी एक रोचक विषय है, क्योंकि अंतरिक्ष में दो प्रकार के तारे होते हैं और दोनों की मृत्यु का तरीका अलग है। इसके बाद आता है अपना विषय - तारों का पुनर्जन्म (Stellar Rebirth)। तारों की मृत्यु के बाद उनमें से गैस और धूल निकलकर अंतरिक्ष में फैल जाती है। यही गैस और धूल एक नए नेबुला (Nebula) का निर्माण करती है। जिसमें से नए तारों का जन्म होता है। 

भारत में दाह संस्कार और पुनर्जन्म को महत्व देने का कारण

प्राचीन भारत के वैज्ञानिक (जिन्हें "ऋषि" उपाधि से संबोधित किया जाता था) पृथ्वी पर मानव जीवन को बनाए रखने के लिए, कई प्रकार के निर्देश स्थापित करते हैं। शायद उन्होंने अपने अध्ययन और निष्कर्ष को डॉक्यूमेंट किया होगा। जैसे कि वर्तमान में NASA, ISRO इत्यादि संस्थाओं के वैज्ञानिक करते हैं, परंतु समय के साथ या तो वह नष्ट हो गए या फिर नष्ट कर दिए गए, लेकिन उन्होंने जो परंपरा स्थापित कर दी थी। उसका पालन आज भी किया जाता है। 

भारतीय परंपराओं में अंतिम संस्कार को अत्यंत महत्व दिया जाता है। विज्ञान द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है कि, जब मनुष्य के शरीर को अग्नि में जलाया जाता है तो उसमें से कई प्रकार की गैस निकलती है। यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही है, जैसे अंतरिक्ष में तारे की मृत्यु के समय गैस निकलती है। पुनर्जन्म के मामले में, अक्सर मरने वाले व्यक्ति की पहचान के बारे में जिक्र होता है। उदाहरण के लिए लोगों का मानना है कि यदि एक "राजा" की मृत्यु हुई है तो उस "राजा" का ही पुनर्जन्म होना चाहिए, परंतु NASA का अध्ययन इस स्थिति को ज्यादा ठीक प्रकार से स्पष्ट करता है।

दाह संस्कार के बाद पुनर्जन्म कैसे होता है

जिस प्रकार तारे की मृत्यु के बाद उसमें से निकली गैस एक नए नेबुला का निर्माण करती है और उस नेबुला से फिर तारे का जन्म होता है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य के दाह संस्कार के बाद उसके शरीर में से निकली गैस एक नए प्राण का निर्माण करती है और वही प्राण किसी माता के गर्भ में शिशु के अस्तित्व का कारण बनता है। ✒ उपदेश अवस्थी। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 

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