DATIA MP NEWS- पीतांबरा माई की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी, रथ यात्रा निकाली जाएगी, श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड भी है

दतिया।
विश्व प्रसिद्ध श्री पीताम्बरा पीठ दतिया में माँ पीताम्बरा जयंती धूमधाम से मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। स्थानीय विधायक एवं मध्य प्रदेश शासन के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा व्यक्तिगत तौर पर इस अवसर को एक विशाल महोत्सव बनाने की कोशिशों में जुट गए हैं। 

दतिया पीतांबरा जयंती कब है, ड्रेस कोड क्या है

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि 4 मई को दतिया में माँ पीताम्बरा जयंती मनाई जायेगी। जयंती पर पीताम्बरा माई रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगी। श्रद्धालुओं द्वारा अपनी आराध्य, प्रातः स्मरणीय मां पीतांबरा का रथ खींचा जाएगा और उसे पूरे दतिया नगर में भ्रमण कराया जाएगा। मंत्री डॉ. मिश्रा ने आव्हान किया कि 4 मई को आयोजित पीताम्बरा जयंती में नगर की अधिक से अधिक जनता सहभागिता करे। 

दतिया पीतांबरा पीठ का संक्षिप्त इतिहास 

पीताम्बरा पीठ की स्थापना एक सिद्ध संत, जिन्हें लोग 'स्वामीजी महाराज' कहकर पुकारते थे, ने 1935 में दतिया के राजा शत्रुजीत सिंह बुन्देला सहयोग से की थी। कभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था। स्वामी जी ने कभी अपना सांसारिक परिचय नहीं दिया परंतु वे परिव्राजकाचार्य दंडी स्वामी थे। श्री पीताम्बरा पीठ, बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो 1920 के दशक में श्रीस्वामी जी द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने आश्रम के भीतर धूमावती देवी के मंदिर की भी स्थापना की थी, जोकि देश भर में एकमात्र है। धूमावती और बगलामुखी दस महाविद्याओं में से दो हैं। 

1962 का चीन युद्ध और पीतांबरा पीठ पर 51 कुंडीय महायज्ञ का इतिहास

सन् 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया था। उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे। भारत के मित्र देशों रूस तथा मिस्र ने भी सहयोग देने से मना कर दिया था। तभी किसी योगी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू से स्वामी महाराज से मिलने को कहा। उस समय नेहरू दतिया आए और स्वामीजी से मिले। स्वामी महाराज ने राष्ट्रहित में एक 51 कुंडीय महायज्ञ करने की बात कही। यज्ञ में सिद्ध पंडितों, तांत्रिकों व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को यज्ञ का यजमान बनाकर यज्ञ प्रारंभ किया गया। यज्ञ के नौंवे दिन जब यज्ञ का समापन होने वाला था, उसी समय 'संयुक्त राष्ट्र संघ' का नेहरू जी को संदेश मिला कि चीन ने आक्रमण रोक दिया है, और 11वें दिन अंतिम आहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं। मन्दिर प्रांगण में वह यज्ञशाला आज भी बनी हुई है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें.