मध्यप्रदेश पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर-प्रोफेसरों की नियमित भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक | MP NEWS
       
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मध्यप्रदेश पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर-प्रोफेसरों की नियमित भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक | MP NEWS

ग्वालियर। हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में असिसटेंट प्रोफेसरों की संविदा लेक्चरर के पदों पर होने वाली बहाली के विज्ञापन (प्राम्भिक सूचना) एवं राजपत्र सहित नियुक्ति को लेकर बनाए गए राज्य सरकार के नियम पर रोक लगा दी है।

मध्यप्रदेश के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में संविदा लेक्चरर अर्थात असिसटेंट प्रोफेसर के पदों पर होने वाली बहाली के विज्ञापन (प्रारंभिक सूचना और राजपत्र) सहित नियुक्ति को लेकर बनाए नियम पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने राज्य की कमलनाथ सरकार को इन सरकारी कॉलेजों में बहाली के लिए नए सिरे से कानून के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इन बहाली के नियमों को निरस्त किया है। ग्वालियर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शील नागू और जज राजीव कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने देवश्री सत्यार्थी और अन्य लोगों की 15 अक्टूबर 2019 को लगाई गई याचिका पर कई सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण आदेश 9 जनवरी 2020 को सुनाया है। इस बारे में याचिकाकर्ताओं के वकील मुकेश नायक और वरिष्ठ वकील एस. के. शर्मा ने अदालत में कहा कि बीते 16 अगस्त 19 को पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर के पदों पर गेट 2020 एग्जाम के माध्यम से भर्ती के लिए प्रारंभिक सूचना विज्ञापन प्रकाशित हुआ था।

याचिका के विरोध में क्या बोले वकील

याचिका के विरोध में ग्वालियर हाईकोर्ट में वकालत कर रहे महाधिवक्ता संगम जैन ने कहा कि तकनीकी शिक्षा विभाग में सुधार के लिए योग्य उम्मीदवारों की बहाली के लिए गेट पास छात्रों को तरजीह देने का प्रावधान किया गया है। देश के कई प्रदेशों में ऐसा होता है।

ग्वालियर हाईकोर्ट ने क्या कहा

उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने संविदा पर जो नियम बनाए हैं, वे कानून के तहत नहीं है। बहाली के दौरान गेट क्वालिफाई उम्मीदवारों को तरजीह दी गई है जबकि बहाली कानून में सभी को एक समान रखा गया है। गेट का वेटेज देना बिल्कुल गलत है क्योंकि गेट का एग्जाम केवल उच्च शिक्षा अध्ययनरत छात्रों के लिए आर्थिक रूप से छात्रवृत्ति प्राप्त कर तकनीकी उच्च शिक्षा को प्राप्त करने, प्रवेश का एक माध्यम है यह कोई भी शैक्षणिक योग्यता नही है, और नही यह शैक्षणिक योग्यता का आधार है। राज्य शासन जो भी भर्ती सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में करेगी बो इस याचिका के अधीन रहेगी और इसके परिणाम के बाद ही कर पाएंगे।