हनी ट्रैप: पुलिस जिसे सरकारी गवाह बना रही है, गैंग में सबसे तेज तर्रार वही छात्रा है | MP NEWS

Bhopal Samachar
इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले में पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि राजगढ की वह छात्रा पूरी गैंग में सबसे ज्यादा शातिर है जिसने खुद को मासूम बताया है और पुलिस जिसे सरकारी गवाह बनाने जा रही है। सूत्रों का कहना है कि गैंग की महिलाओं के सारे राज उसे पता हैं। किसके मोबाइल में कितने वीडियो हैं, इस छात्रा को सब पता था। 

दिल्ली में एक वकील से मदद लेने पहुंची थी तीनों

पुलिस को एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली है। 30 अगस्त को इंदौर में हरभजन सिंह का वीडियो बनने के बाद 4 सितंबर को आरती ने उसे फोन कर 3 करोड़ की मांग की थी। हरभजन ने रुपए देने का मना किया तो आरती-श्वेता और छात्रा तीनों अगले दिन दिल्ली में एक वकील मित्र से मिलने पहुंची। उन्हें बताया कि हरभजन का वीडियो बना लिया है। अब उसे ब्लैकमेल कैसे किया जा सकता है? वकील ने कहा कि वे इसमें कोई मदद नहीं कर सकते। यदि केस लगाना है तो वे मदद कर देंगे।

रिमांड पर सरकारी बंगले में रखा 

रिमांड मिलने के बाद एसआईटी की टीम ने सभी महिलाओं को एक सरकारी बंगले में रखा। वहां से सिर्फ भोपाल में ही छापे के लिए ले जाया गया। बाकी किसी को भी छतरपुर या सागर नहीं ले गए।

छात्रा को लाने के पीछे श्वेता-विजय जैन

तीन दिन तक बंद बंगले में चली पूछताछ में खुलासा हुआ है कि राजगढ़ की छात्रा को गैंग में शामिल करने वाली सरगना आरती दयाल नहीं, बल्कि श्वेता-विजय जैन है। अभिषेक ठाकुर उसी का परिचित है। श्वेता के कहने पर ही अभिषेक ने छात्रा को प्रेम प्रसंग के नाम पर उलझाया। जब छात्रा मान गई तो श्वेता जैन ने चालाकी की और उसने आरती दयाल को आगे कर दिया, ताकि यदि छात्रा कभी फिसल भी जाए तो आरोपी आरती ही बने। जब छात्रा भोपाल आकर आरती के चुंगल में फंस गई तब एक माह बाद श्वेता छात्रा से जाकर मिली थी।

आरोपी के घर से मिली सरकारी विभागों की सील

हनी ट्रैप गैंग में शामिल श्वेता विजय जैन व अन्य आरेापियों के घरों और दफ्तरों की तलाश में पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और चार सरकारी विभागों की सील मिली है। श्वेता के घर से करोड़ों की जमीनों के सौदों के कागज भी बरामद किए गए हैं। एसआईटी को जानकारी मिली है कि इन सील के साथ फर्जी साइन का इस्तेमाल कई सरकारी ठेके लेने, बिल पास करने और अन्य धांधलियों में किया गया है। अब एसआईटी सरकारी सील के दुरुपयोग का एक और केस दर्ज कर सकती है या फिर इसी केस में धारा बढ़ा दी जाएगी। भोपाल मेंं रहने वाली इन महिलाओं के घरों पर छापे के दौरान पुलिस को पैन ड्राइव, मोबाइल, लैपटॉप के अलावा कई चौंकाने वाली चींजे भी मिली हैं। सभी को चार्जशीट पर लिया गया है। 

तलाशी में जब्त सरकारी सीलाें का कई जगहों पर इस्तेमाल किया गया है। सील और अफसरों की फर्जी साइन से कई कामकाज करवाए गए हैं। पता चला है कि इन्हीं सीलों से बिल पास करवाने के अलावा छोटे-मोटे आदेश भी जारी किए गए हैं। सील का कहां और कैसे इस्तेमाल होगा, ये भी महिलाएं अच्छी तरह से जानती थी। घरों से कई बेशकीमती जमीनों के सौदों के कागज भी मिले हैं। ये जमीनें आरोपी महिलाएं खरीदने वाली थी। पुलिस इसकी जानकारी भी जुटा रही है कि इनके पास और कितनी संपत्ति है।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई 

हनी ट्रैप मामले में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी में बार-बार अफसरों को बदला जा रहा है। इस मामले की जांच सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी के द्वारा कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। 

याचिकाकर्ता शेखर चौधरी की तरफ से एडवोकेट धर्मेन्द्र चेलावत ने यह याचिका लगाई है। याचिका में कहा गया है कि जांच के लिए बनाई गई एसआईटी में शामिल अधिकारियों को बार-बार बदला जा रहा है। इससे मामले में शामिल आरोपियों को बचाने का संदेह उत्पन्न होता है। कोर्ट से गुहार की गई है कि सीबीआई या अन्य एजेंसी से जांच कराई जाए जिसकी निगरानी हाईकोर्ट करे। याचिका पर अर्जेन्ट सुनवाई के लिए शुक्रवार को आवेदन लगाया जाएगा।
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