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लोकसभा: पढ़िए सवर्ण आरक्षण पर आज की कार्रवाई और जरूरी बातें | NATIONAL NEWS

08 January 2019

नई दिल्ली। कैबिनेट के फैसले के बाद मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण देने वाला बिल लोकसभा में पेश कर दिया है। केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने संविधान संशोधन बिल को रखा। इस पर बहस शुरू हो चुकी है। सिर्फ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और RJD (राष्ट्रीय जनता दल) ने इसका विरोध किया। 

कांग्रेस- आम आदमी पार्टी ने समर्थन का दिया भरोसा
कांग्रेस संसद में इस विधेयक को पारित करने में मदद करेगी. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘आर्थिक तौर पर गरीब व्यक्ति के बेटे या बेटी को शिक्षा एवं रोजगार में अपना हिस्सा मिलना चाहिए। हम इसके लिए हर कदम का समर्थन करेंगे। अपनी पार्टी का समर्थन व्यक्त करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार से कहा कि वह संसद सत्र का विस्तार करे और इसे तत्काल कानून बनाने के लिए संविधान में संशोधन करे, वरना यह महज ‘चुनावी स्टंट’ साबित होगा।

संविधान में क्या लिखा है
सोशलिस्ट शब्द मूल संविधान में नहीं था लेकिन यह लिखा था कि जस्टिस (राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक) देंगे और अवसरों के मामले में बराबरी देने का प्रयास करेंगे। अब तक संविधान में एससी-एसटी के अलावा सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का कोई जिक्र नहीं है। इस प्रस्ताव पर अमल के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित कराने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में जरूरी संशोधन करने होंगे।

कम से कम दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता
संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। लोकसभा में तो सरकार के पास बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में उसके पास अपने दम पर विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी संख्याबल का अभाव है।

अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में जुड़ेगी अतिरिक्त धारा
संविधान संशोधन विधेयक के जरिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में एक धारा जोड़कर शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा तय की है
सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में अपने फैसले में आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा तय कर दी थी। सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित संविधान संशोधन से अतिरिक्त कोटा का रास्ता साफ हो जाएगा।

किन-किन जातियों को मिलेगा फायदा
प्रस्तावित कानून का लाभ ब्राह्मण, राजपूत (ठाकुर), जाट, मराठा, भूमिहार, कई व्यापारिक जातियों, कापू और कम्मा सहित कई अन्य अगड़ी जातियों को मिलेगा। सूत्रों ने बताया कि अन्य धर्मों के गरीबों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा।

इन शर्तों के आधार पर मिलेगा आरक्षण
सालाना आय 8 लाख रुपए से कम और जिनके पास पांच एकड़ से कम कृषि भूमि है, उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है। नगर निकाय क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट या इससे ज्यादा क्षेत्रफल का फ्लैट नहीं होना चाहिए और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में 200 यार्ड से ज्यादा का फ्लैट नहीं होना चाहिए।



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