फिजूल के चक्कर में: REWA कलेक्टर का बयान कुछ रहस्य भी खोलता है | MP NEWS

02 December 2018

भोपाल। रीवा की जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ मीडिया संस्थानों ने उसे आपत्तिजनक मानकर प्रसारित किया है लेकिन यदि ध्यान से सुनें तो रीवा कलेक्टर की बातों के काफी गहरे अर्थ निकलकर आते हैं।

क्या बयान दिया रीवा कलेक्टर ने
पूरे मध्यप्रदेश में स्ट्रांग रूम को लेकर हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस के आरोप है कि रूम में मशीनें सुरक्षित नहीं हैं। हालात यह हैं कि जबलपुर में कलेक्टर ने स्ट्रांग रूम के दरवाजे पर प्लाई ठुकवा दी। इस बीच आज रीवा की जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक का एक बयान मीडिया की सुर्खियां बन गया। स्ट्रांग रूम का निरीक्षण करने पहुंची कलेक्टर सुरक्षा कर्मियों को निर्देश देते हुए बोलीं-ये चुनाव मेरे लिए मामूली है, फिजूल के चक्कर में 25 साल की साख खराब नहीं करूंगी। यदि कोई दवाब बनाकर स्ट्रांग रूम की तरफ जाए तो बेशक गोली चला देना। 

इस बयान ने कुछ रहस्य भी खोल दिए
दरअसल, रीवा कलेक्टर के इस बयान ने कुछ गहरे रहस्य भी खोल दिए हैं। 
कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक भारतीय प्रशासनिक सेवा की अफसर हैं। 
उनके पति तरुण नायक आईपीएस अफसर हैं। 
ट्रेनिंग के दौरान उन्हे सिखाया गया है कि तनाव की स्थिति में सामान्य कैसे रहें। 
प्रीति मैथिल के इस बयान में उनका तनाव नजर आ रहा है। 
यह माना जा सकता है कि तनाव का स्तर उनकी सहनशक्ति से कहीं ज्यादा था। 
उनका बयान उन लोगों के लिए संदेश है जो तनाव दे रहे हैं। 
यदि हम ध्यान से देखें तो समझ आता है कि बात वैसी नहीं है जैसी वीडियो में सुनाई दे रही है। अब उनके शब्दों पर जरा ध्यान दीजिए: 
ये चुनाव मेरे लिए मामूली है (ये शब्द उस व्यक्ति के लिए हैं जिसने जताया था कि ये चुनाव उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण है)
फिजूल के चक्कर में 25 साल की साख खराब नहीं करूंगी। (यहां 'फिजूल के चक्कर' पर ध्यान देना होगा। वो कौन सा 'फिजूल का चक्कर' है जिसने ना केवल कलेक्टर को तनाव में डाल दिया बल्कि उन्हे स्ट्रांग रूम तक चलकर आना पड़ा और सुरक्षा गार्ड को गोली मारने की छूट देना पड़ी)
यदि कोई दवाब बनाकर स्ट्रांग रूम की तरफ जाए तो बेशक गोली चला देना। ( ये शब्द किसी को यह बताने के लिए हैं कि यदि उसने नियम तोड़ने की कोशिश की तो उसे रोकने के लिए एक सुरक्षागार्ड ही काफी होगा। आप वरिष्ठ स्तर पर दवाब बना सकते हैं परंतु हर 2 घंटे में ड्यूटी बदलते सिपाहियों को कैसे दवाब में लेंगे)

यह पता लगाना कांग्रेस का काम है कि वो कौन है जो कलेक्टरों पर दवाब बना रहा है और स्ट्रांग रूम में कुछ ऐसा करना चाहता है जो गैरकानूनी है और कलेक्टरों को ऐसे दवाब से बचाकर रखना आईएएस एसोसिएशन का काम है। एसोसिएशन इसीलिए होतीं हैं, वो ईवेंट कंपनी नहीं होतीं। 

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