LOKSABHA CHUNAV HINDI NEWS यहां सर्च करें




कांग्रेस सरकार आते ही मध्यप्रदेश में बिजली संकट शुरू | MP NEWS

23 December 2018

भोपाल। बिजली और सड़क के कारण ही दिग्विजय सिंह सरकार का 2003 में पतन हुआ था। अब 15 साल बाद जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई तो एक बार फिर बिजली संकट शुरू हो गया है। कई इलाकों में अचानक बिजली कटौती की जा रही हैै। कारण यह है कि प्रदेश के थर्मल पावर प्लांटों को चलाने के लिए सिर्फ एक से दो दिन का कोयला बचा है। यदि हालात तत्काल नियंत्रित नहीं हुए तो कोयले से बिजली का उत्पादन ही ठप हो जाएगा। 

मध्यप्रदेश में एक तरफ किसान खाद के लिए परेशान हो रहा है तो दूसरी तरफ आम आदमी बिजली की अघोषित कटौती की चपेट में आ गया है। कोयले की कमी के कारण पावर प्लांट में बिजली उत्पादन प्रभावित होने के आसार बन गए हैं। ज्यादातर थर्मल पावर प्लांट में सिर्फ एक से दो दिन का कोयला बचा है। बीजेपी इसके पीछे कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े कर रही है। वहीं कांग्रेस ने खाद के बाद बिजली के लिए जरुरी कोयला नहीं मिलने पर केंद्र सरकार पर भेदभाव की राजनीति का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि रबी सीजन में बिजली की मांग तेरह हजार मेगावाट के आसपास आ रही है। इसी लगातार आपूर्ति का दावा भी बिजली कंपनियां कर रही हैं लेकिन यदि थर्मल पावर प्लांटों को कोयला नहीं मिला तो तय है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में बड़ा बिजली संकट खड़ा हो जाएगा।

कहां कितना कोयल बचा है
अमरकंटक पावर प्लांट 49,580 मीट्रिक टन
सतपुड़ा पावर प्लांट 22,706 मीट्रिक टन
बिरसिंहपुर पावर प्लांट 24,940 मीट्रिक टन
सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट 30,855 मीट्रिक टन



-----------

अपनी पसंदीदा श्रेणी के समाचार पढ़ने कृपया नीचे दिए गए श्रेणी के ​बटन पर क्लिक करें

Suggested News

Loading...

Advertisement

Popular News This Week

 
-->