फसल बीमा : सरकार सुनवाई ना करे तो क्या करें, यहां पढ़िए | MP NEWS

26 November 2018

भोपाल। सरकारें FASAL BIMA YOJANA के नाम पर किसानों को लुभातीं हैं। दावे करतीं हैं कि वो किसानो की फसलों की सुरक्षा कर रहीं हैं परंतु जब INSURANCE क्लैम की बारी आती है तो कई बार प्रीमियम राशि से भी कम का क्लैम दिया जाता है। सैंकड़ों उदाहरण हैं जिसमें मात्र 10 रुपए का क्लैम दिया गया। किसान सरकारों से शिकायत करते हैं पंरतु कोई हल नहीं निकलता परंतु किसानों को निराश होकर बैठ जाने की जरूरत नहीं है। यदि सरकार सुनवाई ना भी करे तो एक रास्ता है आपके पास। हम बता रहे हैं कि ऐसे हालात में किसान क्या करे: 

मामला मध्यप्रदेश के गुना जिले का है। जिला अशोकनगर के गांव मढ़ना खिरिया, छापर, छेलाई जागीर, रावसर जागीर, रुसल्ला खुर्द, अमरोद बदुआ, अमरोद सदुआ, बेटा नई, औरंगा बेरखेड़ी, कालाबाग भोरा, महमूदा, व अन्य ग्रामों के किसानों के 2016 खरीफ सोयाबीन फसल का बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत SBI म्याना शाखा गुना के माध्यम से HDFC ERGO INSURANCE कंपनी से कराया गया था। खरीफ की 2016 की बीमित फसल प्राकृतिक आपदा आने से नष्ट हो गई थी। 

करीब 350 किसानों को को भारी नुक्सान हुआ था परंतु बैंक और बीमा कंपनी एक दूसरे की कमियां बता कर अपना पल्ला झाड़ रहे थे। एडवोकेट सुनील सेमरी ने बताया कि किसानों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कलेक्टर अशोकनगर को शिकायत की थी। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। फिर सभी किसानों ने मिलकर उपभोक्ता फोरम में केस फाइल किया। उपभोक्ता फोरम गुना द्वारा सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए संपूर्ण किसानों को 24,459/- रुपए प्रति हेक्टेयर के मान से 2 माह के भीतर किसानों के बैंक खातों में डालने का आदेश दिया गया हैं। 

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