पीड़िता के बयान बदलने से रेप का आरोपी बरी नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट | Supreme Court news

Advertisement

पीड़िता के बयान बदलने से रेप का आरोपी बरी नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट | Supreme Court news

नई दिल्ली। बलात्कार के मामलों में अक्सर पीड़िताएं कोर्ट में आकर बयान बदल देतीं हैं। कई बार इसके पीछे सौदेबाजी होती है परंतु कभी-कभी दवाब भी होता हैै। दोनों ही स्थितियों में न्याय प्रक्रिया का मजाक बन जाता है। अब ऐसा नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में केवल पीड़ित के बयान बदल देने से आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। यदि उसके खिलाफ साक्ष्य उपलब्ध हैं तो सजा सुनाई जानी चाहिए। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने वह याचिका खारिज कर दी जिसमें सजायाफ्ता आरोपी ने पीड़िता के बयान के आधार पर खुद को निर्दोष बताकर दोषमुक्त रिहाई की मांग की थी। 

कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा
जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि अगर रेप के आरोपी को पीड़िता द्वारा मेडिकल रिपोर्ट के अलावा अन्य किसी भी आधार पर क्लीन चिट भी दे दी जाती है, तब भी उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में दोषी को 10 साल की सजा सुनाई जबकि रेप पीड़िता ने अपना बयान बदलते हुए कहा था कि उनके साथ बलात्कार नहीं हुआ। 

न्याय व्यवस्था का मजाक नहीं बनने देंगे
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, 'क्रिमिनल ट्रायल का मकसद सच सामने लाना है। पूछताछ कैसी हो यह हर केस और उसके तथ्यों पर निर्भर करते है। किसी को निर्दोष मानने और पीड़िता के हक के बीच संतुलन जरूरी है। आरोपी या पीड़ित किसी को यह अनुमित नहीं है कि वह झूठ बोलकर क्रिमिनल ट्रायल को पलट दे और कोर्ट को मजाक का विषय बनाए। किसी को भी यह अनुमति नहीं होगी कि वह अपने बयान को पूरी तरह पलटते हुए मुकर जाए और क्रिमिनल ट्रायल या न्याय व्यवस्था का मजाक बनाए।

14 साल पुराने केस में हुई सुनवाई 
2004 के इस रेप मामले में पीड़िता मात्र 9 साल की थी और उसकी मां ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उसी दिन पीड़िता का मेडिकल चेकअप कराया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी किया, जिसे पीड़िता ने पहचाना भी। छह महीने बाद कोर्ट के सामने पीड़िता और मुख्य गवाह (पीड़िता की बहन) ने रेप की बात को नकार दिया और कहा कि जो चोट लगी थी, वह गिरने की वजह से थी। ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। इस मामले में हाईकोर्ट में अपील की गई। गुजरात हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और रेप पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। दोषी करार दिए जाने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। 

सुप्रीम कोर्ट ने माना- प्रभावित कर सकता है आरोपी 
सबूतों को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'पीड़िता का परिवार गरीब था और वह उसके कुल पांच भाई-बहन हैं। रेप उस समय हुआ जब वह भैंस चराने गई थी। छह महीने बाद रेप पीड़िता ने अपना बयान बदल दिया। ऐसे में हमारा भी मानना है कि गुजरात हाई कोर्ट ने जो तर्क दिए हैं कि आरोपी ने कैसे भी करके पीड़िता को बयान पलटने पर मजबूर किया होगा, सही हैं।' 

बेंच ने आगे कहा, 'अगर कोई पीड़ित/पीड़िता न्यायिक प्रक्रिया को पलट देने के लिए अपना बयान बदल देता है तो कोर्ट चुप नहीं बैठेगा। सच सामने लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। सबूत होने के बावजूद किसी के दबाव के चलते बयान बदलना स्वीकार्य नहीं होगा। पीड़िता द्वारा बयान बदलने के चलते उसके खिलाफ केस चलाए जाने के लिए यह मामला एकदम उपयुक्त है लेकिन क्योंकि यह मामला 14 साल पुराना है इसलिए उन्हें छोड़ा जा रहा है।' 
मध्यप्रदेश और देश की प्रमुख खबरें पढ़ने, MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करेंया फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com