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मुख्यमंत्री महोदय, आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को भी समान वेतन का वरदान दीजिए | KHULA KHAT @ChouhanShivraj

21 April 2018

माननीय मुख्यमंत्री महोदय, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल।
माननीय, निवेदन है कि प्रदेश के लगभग सभी विभागों के कार्यालयों में एजेन्सी के माध्यम से अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं। उनके साथ भेदभाव हो रहा हैं। जिससे मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा हैं।
1. अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी विभाग के उन सभी कर्मचारियों के बराबर काम करता है जिनकों नियमित/संविदा वेतन दिया जा रहा हैं। अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को वो सभी जिम्मेदारी दी जाती है जो एक नियमित/संविदा कर्मचारियों को दी जाती है।

2. नियमित/संविदा कर्मचारियों को हर बार बढ़े हुए मंहगाई भत्ते व अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाता है किन्तु अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को नही।
3. नियमित/संविदा कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखकर उनके लिए भविष्य सुरक्षित करने के लिए सुविधा दी जा रही है किन्तु अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को नही।

4. नियमित/संविदा कर्मचारी हम अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी से उनका भी काम करवाते हे। और हमे दिन रात काम करना पड़ता है।
5. नियमित/संविदा कर्मचारी को शासकीय व एच्छिक अवकाश की पात्रता है किन्तु अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को नही। यह तक कि रविवार को भी काम करना पड़ता है। यदि किसी पारिवारिक /अन्य किसी काम से नही आ पाए तो बाद मे रोब जमाते है।

6. यदि खुद नियमित/संविदा कर्मचारी या उनके घर/परिवार/रिस्तेदार में कोई दुःखद घटना जैसे सड़क दुर्घटना/ किसी की मृत्यू हो जाना या अन्य परिवारिक/सामाजिक कार्यक्रम में यदि उनकी उपस्थिति एक या एक एक माह अनिवार्य हो तो उनका मेडिकल स्वीकार कर लिया जाता है। माह में उपस्थित न हुए और न कोई काम किया जिसके बावजूद वेतन कटोत्रा किए बगैर वेतन अहारण कर दिया जता है किन्तु अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी का नही। जबकि व भी उसी विभाग में काम करता हैं।

7. हम अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी बहुत ईमानदारी एवं कर्तव्य निष्ठा से शासकीय कार्य को पुरी जिम्मेदारी के साथ पूर्ण करते है।
8. अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को एजेन्सी द्वारा समय पर मानदेय भुगतान नही करती है जिसके कारण हमे आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

9. बेरोजगारी के इस युग में कौन अपनी रोजी रोटी कोन छोडना चाहेगा लेकिन जब विभाग में नई एजेन्सी का टेण्डर पास होता है तो हमे आर्थिक, मानसीक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। क्योकि उनके स्थान पर नये कर्मचारी को नियुक्त करने की धमकी दी जाती हैै। रोजगार अचानक छुटने से कर्मचारी को पारिवारिक समस्या बड जाती है। व अजीविका चलाने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
10. 5-6 वर्ष से लगे हुए अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को किसी भी प्रकार का लाभ नही दिया जा रहा है।

11. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यदि कार्य स्थल पर अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी के साथ यदि कोई दुःखद दुर्घटना या मौत हो जाती है तो उसको या उसके परिवार को किसी भी तरह से आर्थिक सहायता प्राप्त नही दी जाती है। है। जो अन्याय की श्रेणी मे हैं।

12. वेतन कम मिलने के कारण कर्मचारी अपने भविष्य के लिए (पेंशन) भी जमा नही कर पाता क्योंकि इतने कम वेतन मै क्या खायेगा क्या बचायेगा। जबकि उसी विभाग के सभी नियमित/संविदा कर्मचारियों के भविष्य के लिए अंशदायी पेंशन/भविष्य निधि जमा होती है। आउट सोर्ससिंग एजेन्सी कर्मचारियों की भविष्य निधि की राशि भी चटकर जाती है।

13. नियमित/संविदा कर्मचारी को यात्रा भत्ते की पात्रता है अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को नही। जबकि वह भी किसी शासकीय कार्य के लिए ही यात्रा करता है। फिर उसे भत्ते की पात्रता नही दी जाती हैं।

14. प्रत्येक माह नियमित/संविदा कर्मचारी को प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के बीच वेतन मिल जाता है किन्तु अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी को नही। जबकि वह भी उसी विभाग मंे काम कर रहा हैं।

15. शासकीय विभाग का कार्य शासन हित को देखकर पूर्ण ईमानदारी व कर्तव्य निष्ठा से करना होता है जिसे नियमित/संविदा कर्मचारी की तरह ही अस्थाई आउट सोर्सिंग कर्मचारी पूर्ण ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा से करता है। फिर उसके साथ भेद भाव क्यो किया जा रहा है।

अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा कर उनका शोषण किया जा रहा हैं। जिससे अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का कही न कही से मानव अधिकारों का हनन हो रहा हैं। कार्य स्थल पर कई प्रकार की यातनाऐं दी जाती हैं। अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का भविष्य कही से भी सुरक्षित नही है।

समता का अधिकार वैश्विक मानवाधिकार के लक्ष्यों के प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अनुसार विश्व के सभी लोग विधि के समक्ष समान हैं अतः वे बिना किसी भेदभाव के विधि के समक्ष न्यायिक सुरक्षा पाने के हक़दार हैं।

उपरोक्त बिन्दुओं में कही न कही अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को संविधान में दिए मानव अधिकारो का हनन किया जा उनका शोषण किया जा रहा हैं। जो मानव अधिकार अधिनियम के विरूद्ध हैं।

अतः अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की इस समस्या पर सहानुभुति पूर्वक विचार कर निम्नलिखित वरदान प्रदान करने का कष्ट करें।

1. जिस पद के लिए अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है उसे उसी पद का निर्धारित वेतनमान दिया जाए
2. नियमित/संविदा कर्मचारी की तरह ही अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को महगाई भत्ता/यात्रा भत्ता और अन्य सुविधा दी जाए।

3. अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भी वेतन भुगतान के लिए पोर्टल तैयार किया जाये जिससे वेतन रिपोर्ट, पोर्टल पर उपलब्ध रहे। ताकि अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल रहा है या नही सार्वजनिक हो। समय वेतन/भविष्य निधि की राशि जमा नही करने वाली एजेन्सी के विरूद्व कार्यवाही हो ऐसा अधिनियम प्रावधानित किया जाये।

4. अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को यदि परिवार के पालन पोषण व अजीविका चालाने के लिए विभाग में कार्य करने की आवश्यकता जब तक वह कार्य करने का इच्छुक हो तो उसकी मूलभूत जरूरत को ध्यान में रखकर उसे आगामी वर्ष के लिए नियुक्ति स्वतः दी जाये। (एजेन्सी चाहे परिवर्तित हो) जिस तरह से संविदा कर्मचारियों को कार्य मुल्यांकन के आधार नियुक्ति बढ़ा दी जाती हैं।

उम्मीद ही नही अपितू अटल विश्वास है। आप इस गम्भीर (पीड़ा दायक बिमारी) समस्या पर जरूर विचार करेंगे एवं जल्द ही अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारी के हित में आदेश/निर्देश जारी करेंगे। क्योंकि आपने इस तुलसी (मध्य प्रदेश) के पेड़ को बरगद बना दिया है। आप न्यायप्रिय एवं जनहितेषी जन नायक हैं।

निवेदक
समस्त अस्थाई आउटसोर्सिंग कर्मचारी,
मध्य प्रदेश



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