उपचुनाव: शिवराज के सजातीय और BJP के माई के लालों ने सबक सिखाया | MP NEWS

Tuesday, March 6, 2018

भोपाल। कोलारस उपचुनाव में मंडल स्तर पर जब भाजपा और कांग्रेस को प्राप्त हुए मतों की समीक्षा की गई तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। कोलारस में दोनों ही पार्टियां भितरघात का शिकार हुईं, जीत कांग्रेस की इसलिए हुई क्योंकि भाजपा में भितरघात ज्यादा हुआ। सीएम शिवराज सिंह को अपने किरार समाज पर काफी भरोसा था लेकिन उन्होंने भाजपा को वोट नहीं दिए। वहीं कोलारस मंडल में वैश्य और ब्राह्मण जो भाजपा का पक्का वोटबैंक थे, भाजपा के खाते से खिसक गए। यही कारण रहा कि भाजपा को बड़ा नुक्सान हुआ। कांग्रेस में यादवों ने भितरघात किया जिससे भाजपा को फायदा हुआ और हार जीत का अंतर कम हो गया। 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय काफी खुश हैं कि कोलारस में उनका वोट प्रतिशत बढ़ा है। शायद वो भूल गए कि इस सीट पर लम्बे समय तक भाजपा का कब्जा रहा है। वो भी तब जब भाजपा प्रत्याशी का प्रचार करने 19 मंत्री, 60 विधायक और खुद मुख्यमंत्री नहीं आए थे। सीएम शिवराज सिंह और नंदकुमार सिंह ने यहां प्रत्याशी चयन में बड़ी गलती की है। उन्हे मालूम था कि कांग्रेस का प्रत्याशी महेंद्र यादव होगा और उसका यादव समाज में विरोध भी है, ऐसे में भाजपा की तरफ से ऐसा प्रत्याशी उतारा जाना चाहिए था जिसका क्षेत्र में विरोध ना होता। यदि भाजपा का लश्कर तीन महीने तक कोलारस में ना होता तो जीत हार का अंतर 08 हजार नहीं 80 हजार होता। 

शिवराज सिंह के समाज ने किया भितरघात

सीएम शिवराज सिंह चौहान को अपने किरार धाकड़ समाज पर बड़ा भरोसा था। समाज की सभा में उन्होंने किसी मंत्री या विधायक को नहीं बल्कि अपने बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान को भेजा था। उम्मीद थी कि इकतरफा वोट मिलेंगे परंतु धाकड़ और रावतों की पोलिंग में भाजपा में भारी नुक्सान हुआ। पूरी सीट पर यह भाजपा का सबसे बड़ा नुक्सान साबित हुआ। यहां से भाजपा को 5000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत अपने समाज को वोट नहीं दिला पाए। 

यादवों ने कांग्रेस प्रत्याशी को नकारा, भाजपा को फायदा हुआ

कांग्रेस को सबसे ज्यादा आशा बदरवास मंडल से थी, क्योंकि यहां के 106 पोलिंग बूथों में से लगभग 60 यादव बाहुल्य हैं, लेकिन यादव बाहुल्य पोलिंग बूथों में कांग्रेस को काफी कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा। टुडय़ावद जहां कि कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र यादव की ससुराल है वहां से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। बदरवास मंडल में कांग्रेस गिरते पड़ते लगभग 1500 मतों से विजयी हुई और रन्नौद मंडल में भी कांग्रेस की विजय का अंतर लगभग इतने ही मतों का रहा। जबकि पिछले चुनाव में यहां से कांग्रेस को 12500 वोटों की बढ़त मिली थी। यह भाजपा की सफलता नहीं बल्कि कांग्रेस में हुआ भितरघात था। 

माई के लालों ने सिखाया सबक

कोलारस नगर से भाजपा को अच्छी उम्मीद थी। यह ब्राह्मण और वैश्य समाज का क्षेत्र है। भाजपा का वोटबैंक रहा है। कठिन दिनों में भी भाजपा यहां से अच्छे वोट हासिल करती आई है पंरतु इस बार भाजपा को बड़ी लीड मिलना तो दूर, मण्डल में जीत तक नहीं मिली। कोलारस में भाजपा को मात्र 4949 मत मिले वहीं कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र यादव को 4927 वोट मिल गए। यह भाजपा के साथ बड़ा भितरघात था। नाराजगी सीएम शिवराज सिंह के प्रति तो थी ही, प्रत्याशी देवेन्द्र जैन के प्रति भी थी। देवेन्द्र जैन ने पिछले सालों में यहां के भाजपा नेताओं को काफी तंग किया था। 

लोकप्रियता ने नहीं भितरघात ने जिताया
कुल मिलाकर इस चुनाव में जो नतीजे सामने आए हैं वो भितरघात और नाराजगी के कारण आए हैं। लोगों ने जिताने के लिए नहीं, हराने के लिए उसके विरोधी को वोट किया। यादवों ने महेंद्र यादव को हराने के लिए भाजपा को वोट दिया तो धाकड़, रावत, वैश्य और ब्राह्मणों ने देवेन्द्र जैन को हराने के लिए कांग्रेस को वोट दिया।

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