GAME KING INDIA के बाद PLAY BAZAAR पर शुरू हुआ आॅनलाइन सट्टा | CRIME NEWS

Thursday, February 1, 2018

नई दिल्ली। ONLINE SATTA OR MATKA का कारोबार पुलिस की पहुंच से काफी दूर आसानी से फलफूल रहा है। 2016 में मप्र पुलिस ने Gameking India Pvt. Ltd कंपनी बनाकर दुनिया के 15 देश और भारत के 7 राज्यों में आॅनलाइन सट्टा कारोबार का खुलासा किया था परंतु सट्टा किंग रमेश चौरसिया (SATTA KING RAMESH CHOURASIA) फरार हो गया था। 2017 में उसे गिरफ्तार किया जा सका। पुलिस का कहना है कि  उसका बेटा अचल चौरसिया (ACHAL CHOURASIA) भी यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका और दुबई में कंपनी का ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क चलाता है। अब बाजार में PLAY BAZAAR के नाम से एक नया आॅनलाइन सट्टा शुरू हुआ है। 

पुलिस के अनुसार ऑनलाइन सट्टा किंग का नेटवर्क सात राज्यों में फैला है। उस पर 14 मामले भी दर्ज हैं। वह 'गेम किंग' नाम से कंपनी रजिस्टर्ड कराकर सट्टे का कारोबार करता है। इस कंपनी का सालाना टर्न-ओवर 200 करोड़ रुपए से अधिक है। इनकी मदद करने वालों में मंत्री और पुलिस अफसर भी शामिल हैं। पुलिस अब सरगना की तलाश में छापे मार रही है।

क्राइम ब्रांच ने 26 जून को श्रीनगर कांकड़ से आरोपी मो. रफीक, धीरज यादव और शाहिद को गिरफ्तार किया था। सभी आरोपी टैबलेट और लैपटॉप पर ऑनलाइन सट्टा खिलाते थे। यह सट्टा गेम किंग प्रालि. कंपनी द्वारा बनाए सॉफ्टवेयर से लगाया जाता था, जिसमें ग्राहक का हारना भी तय रहता है।

पुलिस ने रफीक के बैंक खाते की जानकारी निकाली तो 17 लाख रुपए से अधिक का ट्रांजैक्शन निकला। रफीक ने बताया कि इसके कर्ताधर्ता मुंबई का रमेश चौरसिया और अचल चौरसिया हैं। टीम तारा देवी सेंट्रल मुंबई पहुंची और हेड ऑफिस पर छापा मारा।

15 देशों में है नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, ऑफिस कॉल सेंटर की तर्ज पर चल रहा था। पुलिस ने 10 कम्प्यूटर जब्त किए और ऑफिस को सील कर दिया। रमेश और अचल के बारे में जानकारी जुटाई तो अफसरों के होश उड़ गए। एक कर्मचारी संजय ने बताया 'हमारा नेटवर्क 15 देशों में फैला है। कंपनी एजेंट नियुक्त कर आईडी बना देती है। रोजाना 5 करोड़ से अधिक का सट्टा लगाया जाता है।'

बच्चों को गेम खिलाता था, कंपनी खोल सट्टा लगाने लगा
आरोपी रमेश चौरसिया 1981 में छोटा-सा स्कूल चलाता था। इस दौरान बच्चों को गेम खिलाने लगा। भीड़ बढ़ने लगी तो उसने रुपए लेने शुरू कर दिए। कुछ सालों बाद खुद का सॉफ्टवेयर तैयार किया और 1996 में चौरसिया लीसिंग एंड फाइनेंस प्रालि. नाम से कंपनी खोल ली। इस कंपनी से उसने करोड़ों रुपए कमाए। कुछ समय बाद रिकनेक्ट टेक्नोलॉजी और गेम किंग प्रालि. कंपनी रजिस्टर्ड कराई। इन कंपनियों में 200 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हो चुका है। अभी तक की जांच में रमेश-अचल के साथ आरती चौरसिया का नाम भी सामने आया है।

सात राज्यों में दर्ज हैं मामले
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर जालंधर, मेरठ, समता नगर (मुंबई) ऑर्थर रोड (मुंबई) कांदिवली (मुंबई) लक्ष्मी नगर (दिल्ली) लुधियाना, फरीदाबाद, नागपुर, उल्लास नगर, नोएडा (सेक्टर 58 और 65) फिरोजपुर आदि सहित सात राज्यों में केस दर्ज हैं। आरोपी कानून का फायदा उठाकर कुछ देर में थाने से छूट जाते थे। पुलिस उन पर सट्टा लगाने का केस बनाती और अफसर-नेताओं का फोन आते ही जमानत पर रिहा कर देती थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सट्टाकिंग ने एक सॉफ्टवेयर बना रखा था। जिसमें खिलाड़ी का हारना तय रहता है। पुलिस ने एक सटोरिए को पकड़ा और उसकी शिकायत पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।

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