नईदिल्ली। मुख्यमंत्रियों/मंत्रियों के बड़े बड़े फोटो वाले सरकारी विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जाए, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, लेकिन मोदी सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला गलत है। सरकार चाहती है कि सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अलावा अन्य मंत्रियों, विधायकों और मुख्यमंत्रियों की तस्वीर छपे।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद तीन बड़ी हस्तियों के अलावा किसी की भी तस्वीर सरकारी विज्ञापन में प्रकाशित होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ फिर सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दलील दी है। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी है कि हर मंत्री अपने अपने विभाग में कार्य करता है फिर भला वह सरकारी विज्ञापनों में अपने काम के बारे में अपनी जनता को क्यों न बताएं। रोहतगी ने कहा कि विज्ञापनों का खर्चा सरकारी बजट पर किया जाता है। ऐसे में विधायिका के काम में सुप्रीम कोर्ट दखल नहीं दे सकती, ये संविधान के नियम के खिलाफ है।