नईदिल्ली। अमेरिका इन दिनों भारत में ईसाईयों के बढ़ते प्रभुत्व पर लगाम की कार्रवाई से घबराया हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस के एक पैनल ने कहा है कि भारत में अब अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है, यहां अल्पसंख्यक ने अमेरिका का तात्पर्य ईसाईयों से है। वो मुसलमानों के कभी प्रेम नहीं करता और ना ही उनकी सुरक्षा की परवाह करता है। सांसदों ने बराक ओबामा को ड्यूटी सौंपी है कि वो अपने दोस्त नरेन्द्र मोदी पर दवाब बनाएं।
इसके बाद भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने ट्वीट कर कहा है कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, समाज और संविधान से अन्जान लोगों का भारत को साम्प्रदायिक सौहार्द पर सर्टिफिकेट ठीक नहीं। दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि NGO's के लाइसेंस की शर्त पर भारत की धार्मिक आजादी और सौहार्द का आकलन उचित नहीं।
गुरुवार को जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में अमेरिकी आयोग ने हिंसा और नेताओं के भड़काऊ बयानों को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना भी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार बनने के बाद से भाजपा नेताओं ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अपमानजनक टिप्पणियां की। हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने जबरन धर्मातरण और हमलों जैसी कार्रवाइयों को अंजाम दिया। रिपोर्ट में विहिप के घर वापसी कार्यक्रम का हवाला दिया गया है।
सार्वजनिक फटकार
आयोग ने ओबामा से भड़काऊ बयान देने वाले नेताओं को सार्वजनिक तौर पर फटकार लगाने और धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए भारत पर दबाव बढ़ाने को कहा है। इससे पहले दिसंबर में आयोग ने घर वापसी की आलोचना करते हुए कहा था कि अल्पसंख्यकों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। ऐसा करने वाले हिंदुओं का आर्थिक सहायता दिए जाने की बात भी आयोग ने कही थी।
मोदी को सराहा
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को सकारात्मक कदम बताया गया है जिसमें उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात कही थी। फरवरी में प्रधानमंत्री ने चर्चो पर हमले की निंदा करते हुए अल्पसंख्यकों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया था। हालांकि रिपोर्ट में इस बयान को गुजरात में 2002 में हुए दंगों से जोड़ते हुए कहा गया है कि मोदी उस वक्त राज्य के मुख्यमंत्री थे और उन पर दंगे भड़काने का आरोप लगा था।
फिर टियर-2 में
आयोग ने इस साल भी भारत को टियर-2 देशों की सूची में ही जगह दी है। भारत 2009 से इसी सूची में बना हुआ है। इस श्रेणी में अफगानिस्तान, रूस, क्यूबा, मलेशिया और तुर्की सहित कुल 10 देश हैं। यह रिपोर्ट मुख्य तौर पर धर्मगुरुओं और गैरसरकारी संगठनों से बातचीत पर तैयार की गई है।
संवेदनशील राज्य
रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को धार्मिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्य बताते हुए कहा है कि यहां धार्मिक आधार पर हमले और घटनाएं होती हैं।
सीमित समझ पर आधारित है रिपोर्ट : विदेश मंत्रालय
इस रिपोर्ट को भारत सरकार ने खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रिपोर्ट भारत के समाज और संविधान को लेकर आयोग की सीमित समझ पर आधारित है।
